एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: विशाल चतुर्वेदी ने खोले ‘हनुमान अंश’ के कई राज, नई पीढ़ी और अध्यात्म पर जानिए क्या बोले
डॉ. विशाल चतुर्वेदी, बाबा नीब करौरी का किरदार निभाने वाले सौभिनव, बाबा जी की पत्नी रामबेटी का किरदार निभाने वालीं पूर्णिमा तिवारी और गीतों के जरिये जनमानस तक पहुंचे सत्या तिवारी हाल ही में देहरादून पहुंचे थे। पढ़िए उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
विस्तार
करोड़ की लागत से 100 करोड़ की कमाई करने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ हॉलीवुड व बॉलीवुड के लिए रिसर्च का विषय हो सकती है, लेकिन भारतीय समाज के सभी आयु वर्ग, धर्म और क्षेत्रों ने इसे जिस तरह आत्मसात किया है, उसकी छाप साफ दिख रही है। नई पीढ़ी में भी बदलाव नजर आ रहा है। युवाओं की पसंद से अलग ‘हनुमान अंश’ के गीत स्कूली बच्चों और युवाओं की जुबां पर चढ़ गए हैं और वे इन पर रील बना रहे हैं। फिल्म के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, नई पीढ़ी के लिए अध्यात्म से जुड़ने और स्वस्थ मनोरंजन का प्रसाद है ‘हनुमान अंश’। उनका कहना है कि नई पीढ़ी हमारी बात समझ रही है, इससे बड़ी कमाई और क्या हो सकती है।
सवाल: विशाल जी, आपने फिल्म में पूरी हनुमान चालीसा सुनाई और शूटिंग के दौरान भी इसका पाठ किया। इसका क्या राज है? क्या लगा था कि आज की पीढ़ी आध्यात्मिक बातें समझेगी?
जवाब: मैं इसे महाराज जी का प्रसाद मानता हूं। महाराज जी के समय तमाम विदेशी और पाश्चात्य परिवेश से आए लोगों के जीवन में उनके संपर्क से बदलाव हुआ। नई पीढ़ी बहुत क्षमतावान और समझदार है। प्रमोशन के लिए स्कूल-कॉलेजों में युवाओं के बीच जा रहा हूं और देख रहा हूं कि फिल्म और किरदारों को लेकर जबरदस्त क्रेज है। इसे मैं बेहतरीन परिवर्तन मानता हूं। अब ऐसे विषयों पर चर्चा होगी और ऐसी फिल्में भी बनेंगी, जिन्हें युवा पसंद करेगा। इससे मेरी मान्यता को बल मिला है। शूटिंग के पहले दिन महाराज जी का किरदार निभाने वाले अभिनेता अचानक बीमार पड़ गए। दूसरे दिन नए कलाकार सौभिनव के साथ शूटिंग शुरू करने पहुंचे तो कैमरा रोल नहीं हुआ। अड़चनें आती रहीं, फिर मैंने सब हनुमान जी पर छोड़ दिया। पूरी टीम के साथ हनुमान चालीसा पढ़ी। चालीसा खत्म होते-होते पता नहीं कौन-सी ऊर्जा हम सबमें आ गई। शूटिंग के दौरान जब-जब अटके, चालीसा पढ़ते रहे और संकट कटते रहे।
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सवाल: सौभिनव जी, बाबा नीब करौरी महाराज का किरदार निभाने का अनुभव कैसा रहा? आज जब लोग आपमें उनका अंश खोजते हैं, तो कैसा महसूस होता है?
जवाब: मेरे लिए ये एक चमत्कार है, आप इसे लीला भी कह सकते हैं। बाबा हमेशा ऐसा ही करते हैं। हनुमान जी की कृपा से यह हुआ। जब आपको कुछ पता न हो तो बस आंखें बंद करके हनुमान जी की ओर हाथ बढ़ा दो, फिर वही आगे बढ़ाते चले जाते हैं। मुझे पता भी नहीं था कि मैं विशाल जी के सहायक के तौर पर फिल्म से जुड़ा था, लेकिन शायद बाबा जी की ही मर्जी थी, उन्होंने मुझे चुना। मुझे यह किरदार निभाना था, इसीलिए शायद मैंने आठ साल पहले ही नॉनवेज छोड़ दिया और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगा। लोगों का यह प्यार दरअसल बाबा का प्यार है। शायद उन्होंने मुझे पहले ही चुन लिया था, इसीलिए मैं सात्त्विक जीवन जीने लगा था।
सवाल: सत्या तिवारी जी, ‘पार्वती’ गाने ने आपको घर-घर पहुंचा दिया। यह पहले से तैयार था या फिल्म निर्माण के दौरान?
जवाब: फिल्म के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी जी पुराने मित्र और बेहतरीन म्यूजिक डायरेक्टर हैं। फिल्म के सभी गीत हिट हुए, इसका श्रेय उन्हें ही जाता है। सभी गीतों को काफी समय लेकर तैयार किया गया, इसमें मेरे अलावा अन्य कंपोजर भी हैं। फिल्म में मैंने पांच गीत लिखे और गाए हैं। प्रमोशन के दौरान जब लोग सामूहिक रूप से मेरे गीत गाते हैं, खासकर स्कूली बच्चों को सुर में गाते देखकर लगता है कि भोलेनाथ ने मुझे सफल कर दिया।
सवाल: विशाल जी, आप पेशे से डॉक्टर हैं और उत्तराखंड से भी जुड़े रहे हैं। बाबा नीब करौरी पर फिल्म बनाने का ख्याल कैसे आया? ऐसी फिल्म बनाने के लिए कई तरह के बंधन होते हैं...
जवाब: मैं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में पोस्टेड था। हम युवा डॉक्टर अक्सर बाइक या कार से पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में घूमने निकलते थे। एक दिन नई जगह की तलाश में निकले। बारिश तेज थी, धुंध और ठंड के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हमारे साथ गाड़ी चला रहे डॉक्टर अभिषेक मान को भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हमने कहा, ‘मार ही डालोगे क्या, कुछ दिखाई नहीं दे रहा।’ अचानक कुछ सेकेंड में बारिश रुक गई, धुंध छंट गई और सब साफ दिखाई देने लगा। बगल में नदी बहने की आवाज आ रही थी। गाड़ी का दरवाजा खोला तो सामने वह पुल था, जो मंदिर की ओर जाता था। अचानक धुंध का छंटना, बारिश रुकना और सीधे मंदिर के गेट तक पहुंचना—जो हुआ, वह साधारण नहीं था। हमने हनुमान जी के दर्शन किए और मेरे भीतर बदलाव आया। इसके बाद मैं महाराज जी को समझने और उनकी खोज में जुट गया।
सवाल: पूर्णिमा जी, आपने फिल्म में बाबा जी की धर्मपत्नी रामबेटी का किरदार निभाया। कैसा लगा?
जवाब: फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं बाबा जी की भक्त रही हूं और राम जी को भी भजती रही हूं। राम नाम लेने से मुझे आस्था और सुकून मिलता है। फिल्म में यह मौका मिला तो मैंने इसे आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया। भूमिका बड़ी नहीं है, लेकिन छोटी-सी भूमिका में जो भाव आप देख रहे हैं, उसे मैंने खुद में अनुभव किया। शायद इसीलिए मैं दर्शकों के करीब पहुंच पाई। इसे बाबा जी का चमत्कार ही मानिए।
सवाल: विशाल जी, फिल्म में कई जगह बंदर दिखाई दिए हैं?
जवाब: पूरी फिल्म की शूटिंग रियल लोकेशन यानी खेत-खलिहान और गांव में हुई। जिस समय बाबा जी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर रहे थे, उसी दौरान पता नहीं कहां से एक लंगूर आया और मूर्ति के ठीक ऊपर आकर बैठ गया। गांव वालों ने बताया कि 10 साल से यहां बंदर नहीं आया था।