आम तौर पर सभी विष्णु मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना उनके खड़े रूप में की जाती है, लेकिन बदरीनाथ धाम में विष्णु भगवान विग्रह पद्मासन की मुद्रा में हैं। वहीं, बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि बदरीनाथ धाम में भगवान बदरीनाथ के साथ ही हर दिन कॉकरोच, गाय और पक्षियों को भी चावल का भोग लगाया जाता है। भोग प्रक्रिया का बदरीनाथ मंदिर के दस्तूर में उल्लेख है।
बदरीनाथ धाम: कपाट खुलते ही गूंजे बदरी विशाल के जयकारे, तस्वीरों में देखें मंदिर की अद्भुत छटा...
बदरीनाथ मंदिर के समीप गरुड़ शिला की तलहटी में कॉकरोच (गढ़वाली बोली में सांगला) दिखाई देते हैं, ये कॉकरोच सामान्य कॉकरोच से आकार में थोड़ा बड़े होते हैं। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि बदरीनाथ जी को प्रतिदिन केसर का भोग लगाया जाता है, जबकि कॉकरोच, गाय और पक्षियों को भी प्रतिदिन एक-एक किलो चावल का भोग लगाया जाता है।
वे बताते हैं कि धाम में कॉकरोच को भोग लगाने का उल्लेख बकायदा मंदिर के दस्तूर में लिखा हुआ है। कॉकरोच को भोग क्यों लगाया जाता है, इसका कहीं भी उल्लेख नहीं मिलता है। पुराणों में कहा गया है कि आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने बदरीनाथ धाम की स्थापना की थी।
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badrinath, बदरीनाथ
- फोटो : अमर उजाला
धर्माधिकारी का कहना है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने बदरीनाथ की पदमासन शिला को तप्तकुंड से उठाकर गरुड़ शिला के नीचे रख दिया था, जहां कॉकरोच रहते थे। बदरीनाथ मंदिर की स्थापना होने के बाद से ही धाम में कॉकरोच को भी प्रतिदिन भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई।
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बदरीनाथ
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मेष लग्न और पुष्य नक्षत्र में तड़के 4 बजकर 15 मिनट पर खोल दिए गए थे। अब छह माह तक ग्रीष्मकाल में निरंतर भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना का जिम्मा रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी सौंप दिया गया है।
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बदरीनाथ हाईवे
- फोटो : अमर उजाला
बदरीनाथ धाम की इस वर्ष की पहली महाभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरी महाभिषेक पूजा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नाम से की गई। बदरीनाथ के कपाट खुलने के बाद हक-हकूकधारी व वेदपाठी ब्राह्मणों ने बदरीनाथ की अखंड ज्योति के दर्शन किए।
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बदरीनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
धाम के कपाट खुलने के बाद रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने बदरीश पंचायत (बदरीनाथ गर्भगृह) से माता लक्ष्मी की प्रतिमा को बदरीनाथ परिक्रमा स्थल में स्थित उनके मंदिर में विराजमान किया और उद्धव व कुबेर महाराज की प्रतिमा को बदरीश पंचायत में विराजमान किया गया।