भारतीय शास्त्रों में वर्ष में दो बार नवरात्र मनाने की परंपरा है। इसमें से वसंतीय नवरात्र (चैत्र नवरात्र) नवजीवन व नए बीजों के अंकुरण का प्रतीक है। जो औषधियां वसंत ऋतु में अंकुरित होती हैं। वे शरद में परिपूर्ण होकर मानव कल्याण के काम आती हैं। इसलिए दोनों ऋतुओं में मनाया जाने वाले नवरात्र का अपना अपना महत्व है।
चैत्र नवरात्र 2019: मां दुर्गा के नव रूपों से संबंधित ये नौ औषधियां होती हैं बड़ी गुणकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदू मान्यता के अनुसार वसंत ऋतु जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। जब प्रकृति अपना श्रंगार कर मानव को जीवन जीने की ललक के लिए प्रेरित करती है। शरद ऋतु संपन्नता का प्रतीक है। पंडित ललिता प्रसाद पुरोहित के अनुसार वसंत व शरद दोनों ऋतुओं में दिन रात बराबर होते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दोनों ऋतुओं में कई प्रकार के रोगों में भी वृद्धि होती है।
इसलिए सभी प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए ‘आद्य शक्ति स्वरूपा’ देवी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। भारतीय शास्त्रों में नव दुर्गा रूपी नौ औषधियों का पूजन करने की परंपरा है जो शरीर में होने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए विलक्षण औषधि का काम करती हैं।
1. शैल पुत्री- औषधि : पाषाण भेद (शिलपाड़ी)- पथरी, शरीर में बनने वाली गांठ आदि रोगों के निवारण में काम आती है।
2. ब्रह्मचारिणी- औषधि : ब्राह्मी - दिमागी शांति, बुद्धि वृद्धि सहित मस्तिष्क संबंधित सभी रोगों के निवारण के काम आती है।
3. चंद्रघंटा- औषधि : चंद्रसूर (चकुंडा) -सभी प्रकार के ज्वरों का नाश करने में सहायक।
5. स्कंधमाता- औषधि : तुलसी- दिव्य गुणों से युक्त सर्वगुण संपन्न औषधि।
6. कात्यायनी- औषधि : नागर मोथा-गर्मी से संबंधित सभी रोगों के निवारण में सहायक।