उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का ये सूदूरवर्ती गांव धीरे-धीरे अंधेरे की चपेट में आ रहा है। अगर आप इसके पीछे का कारण जान लेंगे तो हैरान रह जाएंगे।
हर शाम 'अंधी' हो जाती है ये 13 वर्षीय मासूम, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे आप
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ओसला गांव में 13 साल की बच्ची से लेकर 70 साल के बुजुर्गों तक की आंखों की रोशनी गायब हो रही है। कुछ जानकार इसे नाइट ब्लाइंडनेस की बीमारी बताते हैं तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी विटामिन ए की कमी के चलते यह समस्या होने की बात कह रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी ने इस गांव की ओर रुख नहीं किया है। अमर उजाला के सवाल करने पर वे कहते हैं कि जांच के लिए डाक्टरों की टीम जल्द ही गांव भेजी जाएगी।
जिला मुख्यालय से करीब 200 किमी दूर बसे सीमांत ओसला गांव में तमाम ग्रामीण आंखों की बीमारी से पीड़ित हैं। खबर मिलने पर अमर उजाला रिपोर्टर ने इस पूरे इलाके में पड़ताल की तो हालात चौंकाने वाले नजर आए। 13 साल की मनीषा को ही लें। प्यारी सी इस बच्ची के आंखों की रोशनी बचपन में ही गायब हो गई है।
मनीषा की मां कलगा देवी बताती हैं कि दिन में तो कुछ हद तक बिटिया को दिखाई देता है, लेकिन शाम ढलते ही उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। उन्होंने पिछले दिनों मनीषा को देहरादून के जौलीग्रांट अस्पताल में दिखाया था, जहां चिकित्सकों ने जवाब दे दिया है कि इसका कोई इलाज नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ वर्षों के बाद बिटिया को दिन में भी दिखाई देना बंद हो जाएगा। मनीषा के पिता ज्वार सिंह भी एक आंख की रोशनी गंवा चुके हैं।
इसी तरह 32 वर्षीय बिन्द्री देवी के विवाह को 14 साल हो गए हैं, लेकिन विवाह के कुछ वर्षों बाद ही उसकी दोनों आंखों की रोशनी अचानक गायब हो गई। इसके चलते पति ने भी उसे छोड़ दिया और उसे अपने मायके ओसला गांव लौटना पड़ा। बिन मां-बाप की बिन्द्री देवी का पालन-पोषण उसके ताई-ताऊ कर रहे हैं, लेकिन बिन्द्री को खुद की आंखों से ज्यादा अपने तीन बच्चों की चिंता है। बच्चों के भविष्य को लेकर वह हर वक्त परेशान रहती है, क्योंकि शायद आंखों से देख पाती तो वह कुछ काम कर पाती।