फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

हर शाम 'अंधी' हो जाती है ये 13 वर्षीय मासूम, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे आप

Mon, 05 Dec 2016 09:43 AM IST
ओम प्रकाश जोशी/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
ओम प्रकाश जोशी/ अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Mon, 05 Dec 2016 09:43 AM IST
विज्ञापन
blindness spread out in osala village uttarkashi
manisha

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले का ये सूदूरवर्ती गांव धीरे-धीरे अंधेरे की चपेट में आ रहा है। अगर आप इसके पीछे का कारण जान लेंगे तो हैरान रह जाएंगे।

blindness spread out in osala village uttarkashi
rat joshi

ओसला गांव में 13 साल की बच्ची से लेकर 70 साल के बुजुर्गों तक की आंखों की रोशनी गायब हो रही है। कुछ जानकार इसे नाइट ब्लाइंडनेस की बीमारी बताते हैं तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी विटामिन ए की कमी के चलते यह समस्या होने की बात कह रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी ने इस गांव की ओर रुख नहीं किया है। अमर उजाला के सवाल करने पर वे कहते हैं कि जांच के लिए डाक्टरों की टीम जल्द ही गांव भेजी जाएगी।
 

blindness spread out in osala village uttarkashi
manisha

जिला मुख्यालय से करीब 200 किमी दूर बसे सीमांत ओसला गांव में तमाम ग्रामीण आंखों की बीमारी से पीड़ित हैं। खबर मिलने पर अमर उजाला रिपोर्टर ने इस पूरे इलाके में पड़ताल की तो हालात चौंकाने वाले नजर आए। 13 साल की मनीषा को ही लें। प्यारी सी इस बच्ची के आंखों की रोशनी बचपन में ही गायब हो गई है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
blindness spread out in osala village uttarkashi
osala village - फोटो : amar ujala

मनीषा की मां कलगा देवी बताती हैं कि दिन में तो कुछ हद तक बिटिया को दिखाई देता है, लेकिन शाम ढलते ही उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। उन्होंने पिछले दिनों मनीषा को देहरादून के जौलीग्रांट अस्पताल में दिखाया था, जहां चिकित्सकों ने जवाब दे दिया है कि इसका कोई इलाज नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ वर्षों के बाद बिटिया को दिन में भी दिखाई देना बंद हो जाएगा। मनीषा के पिता ज्वार सिंह भी एक आंख की रोशनी गंवा चुके हैं।
 

विज्ञापन
blindness spread out in osala village uttarkashi
अांख

इसी तरह 32 वर्षीय बिन्द्री देवी के विवाह को 14 साल हो गए हैं, लेकिन विवाह के कुछ वर्षों बाद ही उसकी दोनों आंखों की रोशनी अचानक गायब हो गई। इसके चलते पति ने भी उसे छोड़ दिया और उसे अपने मायके ओसला गांव लौटना पड़ा। बिन मां-बाप की बिन्द्री देवी का पालन-पोषण उसके ताई-ताऊ कर रहे हैं, लेकिन बिन्द्री को खुद की आंखों से ज्यादा अपने तीन बच्चों की चिंता है। बच्चों के भविष्य को लेकर वह हर वक्त परेशान रहती है, क्योंकि शायद आंखों से देख पाती तो वह कुछ काम कर पाती।
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed