सीडीएस जनरल बिपिन रावत के युद्ध कौशल से चीन और पाकिस्तान घबराते थे। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से सदियों तक लोगों के जेहन में रहेंगे। गुरुवार को बिपिन रावत के गृह राज्य में उत्तराखंड में हर कोई दुखी था। शोक सभाओं को दौर जारी था।
गढ़वाल के कई इलाकों में बाजार बंद रखे गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत सभी मंत्री, विधायकों और राजनीतिक दलों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस दौरान लोग भावुक दिखाई दिए। सीडीएस रावत के निधन को राज्य और देश की बड़ी क्षति करार दिया। देहरादून स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में, श्रीनगर गढ़वाल विवि में, कोटद्वार, उत्तरकाशी और पौड़ी सहित पूरे राज्य में सीडीएस स्व. बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दी गई। उनके पैतृक गांव में भी शोक सभा का आयोजन किया गया। जहां आसपास के गांव के लोग भी पहुंचे।
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भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत जवाबी कार्रवाई के एक्सपर्ट थे। सैम मानेक शॉ के बाद वह दूसरे ऐसे जनरल थे जो युद्ध रणनीति में माहिर थे और स्वयं युद्ध क्षेत्रों में पहुंचते थे। उनके रणनीतिक कौशल के चलते चीन और पाकिस्तान की सेनाएं भी उनसे घबराती थीं। यह कहना है कि सेना के ले. कर्नल (रिटायर्ड) एसपी गुलेरिया का।
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- फोटो : अमर उजाला
कर्नल गुलेरिया ने कहा कि चीन ने भूटान और सिक्किम के बॉर्डर पर गतिविधियां बढ़ाईं लेकिन जनरल बिपिन रावत की रणनीति ने चीन को भूटान के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से रोके रखा।
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सीमा पर चल रहीं गतिविधियों को रोकने के लिए उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक भी कराई। मेजर जनरल रहने के दौरान यूएनओ में शांति सेना का भी उन्होंने नेतृत्व किया था। उनका युद्ध करने का जो तरीका था, वह अपने आप में अनूठा था। वे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध का विशेष अनुभव रखते थे।
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सेनाध्यक्ष रहने के दौरान उन्हीं की रणनीति से पाकिस्तान की सीमा से घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई और सीमा पर जवानों की मौतों में कमी आई।
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सीडीएस बिपिन रावत को श्रद्धांजलि देने का क्रम जारी
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उनके अनुभव और कौशल से ही पाकिस्तान और चीन को डर था कि उनकी सेनाएं जनरल बिपिन की रणनीति के सामने नहीं टिक पाएंगी।