उत्तराखंड से लगी चीन की सीमा पर स्थित इस गांव के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां आता है उसकी गरीबी दूर हो जाती है। यहीं नहीं इस गांव को श्रापमुक्त जगह का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि व्यक्ति के यहां एक बार आने पर वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
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- फोटो : GirishRanjalTiwari
इस गांव पर चीन भी नजर बनाए हुए था। लेकिन यहां नागरिकों ने चीन के भारी दबाव और लालच के बावजूद इस समूचे क्षेत्र को चीन के प्रभुत्व में आने से बचाकर भारत में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई।
समुद्र तल से 10,248 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह भारतीय सीमा का अंतिम गांव है। पवित्र बदरीनाथ धाम से 3 किमी आगे भारत और तिब्बत की सीमा स्थित इस यह गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा था।
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के उपाध्यक्ष पंडित नंद किशोर पुरोहित के अनुसार डॉ. नंद किशोर के मुताबिक माणिक शाह नाम एक व्यापारी था जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था। एक बार व्यापारिक यात्रा के दौरान लुटेरों ने उसका सिर काटकर कत्ल कर दिया।
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लेकिन इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप कर रही थी। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया। इसके बाद माना गांव में मणिभद्र की पूजा की जाने लगी। शिव ने माणिक शाह को वरदान दिया कि माणा आने पर व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाएगी।