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बसंत पंचमी 2020: दूर करें कंफ्यूजन, ये है सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त और दिन 

Tue, 28 Jan 2020 05:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंबा (टिहरी) Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 28 Jan 2020 05:06 PM IST
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Basant Panchami 2020 Goddess saraswati puja pujan timing and date Confusion

ज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है, लेकिन इस बार पंचमी तिथि 29 और 30 जनवरी को दो दिन आने से मतभेद उत्पन्न हो गया है। ऐसे में धर्म सिंधु ग्रंथों के निर्णय के अनुसार चतुर्थी तिथि युक्त पंचमी यानी 29 जनवरी को बसंत पंचमी  मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। 

Basant Panchami 2020 Goddess saraswati puja pujan timing and date Confusion

मान्यता है कि इस दिन देवी सरस्वती की पूजा-आराधना करने से बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती का जन्म दिवस मनाया जाता है। माता सरस्वती को बुद्धि, विद्या, ज्ञान और वाणी की देवी कहा गया है। इसी दिन से ऋतुओं के राजा बसंत पंचमी की शुरूआत भी होती है। इसलिए इस दिन को बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। 

Basant Panchami 2020 Goddess saraswati puja pujan timing and date Confusion

इस बार बसंत पंचमी  की तिथि को लेकर उलझन बनी हुई है। दरअसल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरूआत 29 जनवरी को सुबह 10.45 बजे से हो रही है और समापन 30 तारीख को 1.19 बजे हो रही है। ऐसे में दो दिन पंचमी तिथि आने से लोगों में उलझन बनी हुई है। धर्म सिंधु ग्रंथों के निर्णय के अनुसार 29 जनवरी बुधवार को चतुर्थी तिथि युक्त पंचमी तिथि को पर्व मनाना शास्त्रोक्त रूप से श्रेष्ठ रहेगा। 

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Basant Panchami 2020 Goddess saraswati puja pujan timing and date Confusion

ज्योतिष के अनुसार बसंत पंचमी  का दिन शादी-विवाह और नए काम की शुरूआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। बसंत पंचमी  के दिन से प्रकृति के नए शृंगार होने से चारों और हरियाली और खुशहाली का वातावरण छा जाता है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय शंकर भट्ट और वासुदेव सेमवाल का कहना है कि दो दिन पंचमी आने पर चतुर्थीयुक्त पंचमी को पर्व के लिए ग्राह्य करना श्रेष्ठकर है। 

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बसंत पंचमी  के दिन सरस्वती पूजन पीले वस्त्र पहनकर की जाती है। सनातन धर्म में पीले रंग को अत्यधिक शुभ माना जाता है। साथ ही पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक भी माना जाता है। यह सादगी देता है, तो निर्मलता भी दर्शाता है। यही कारण है कि विवाह, मुंडन आदि के निमंत्रण पत्रों को भी पीले रंगों में प्रकाशित किया जाता है। इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है। बसंत  ऋतु पर सरसों की फसलें खेतों में लहलहाती हैं, तो वह भी पीले रंग में ही सजी होती है।

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