बदरीनाथ हाईवे कभी भी लंबे समय के लिए अवरुद्ध हो सकता है। लामबगड़ में पहाड़ी के शीर्ष भाग पर पड़ी दरार ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने लामबगड़ पहाड़ी के जियोलॉजिकल सर्वे की मांग उठाई है।
लामबगड़ भूस्खलन जोन पिछले दो दशक से बदरीनाथ धाम की सुचारू तीर्थयात्रा में रोड़ा बनता रहा है। यहां थोड़ी सी बारिश होने पर भी चट्टान से भूस्खलन सक्रिय हो जाता है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।
पूर्व में यहां हाईवे के सुधारीकरण का काम बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) को सौंपा गया था। जब भूस्खलन जोन का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका तो प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में लामबगड़ का करीब 800 मीटर का हिस्सा लोनिवि के एनएच खंड को दे दिया।
यहां एनएच की ओर से पिछले डेढ़ साल से अलकनंदा साइड से सुधारीकरण कार्य किया जा रहा है, लेकिन भूस्खलन वाली पहाड़ी पर कोई सुधारीकरण कार्य नहीं होने से यहां लगातार भूस्खलन हो रहा है। हाल की बारिश से लामबगड़ चट्टान के शीर्ष भाग में दरार पड़ गई हैं, इस स्थिति में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक कर कभी भी हाईवे पर आ सकता है।
जोशीमठ के उपजिलाधिकारी अनिल कुमार चन्याल ने बताया कि प्रशासन की ओर से लामबगड़ चट्टान के शीर्ष भाग में पड़ी दरार का स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है। इसकी रिपोर्ट भी उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। प्रशासन ने उच्च अधिकारियों से शीघ्र लामबगड़ का जियोलॉजिकल सर्वे कर इसके ट्रीटमेंट की मांग की है।