आपको जानकर शायद यकीन न हो, लेकिन भगवान विष्ण़ु के इस धाम में एक मुस्लिम की लिखी आरती ही सुबह-शाम गाई जाती है। भगवान इसी से प्रसन्न होते हैं। पढ़िए अनोखी कहानी...
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- फोटो : amarujala
हिंदू धर्म में सदियों से यह परम्परा चली आ रही है कि मंदिर में पूजा सिर्फ ब्राह्मण ही करेंगे। वहीं पूजा के लिए जितने भी ग्रंथ लिखे गए हैं वे भी ब्राह्मणों ने ही लिखे हैं। लेकिन एक मंदिर ऐसा भी है जहां पूजा सिर्फ मुस्लिम के द्वारा लिखी आरती से ही की जाती है।
तो चलिए हम आपको बताते हैं इस सांप्रदायिक सौहार्द की कहानी। भगवान बद्रीनाथ धाम को हिंदुओं का तीर्थ माना जाता है और यहां उनकी पूजा सिर्फ ब्राह्मण ही कर सकते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बद्रीविशाल की आरती किसने लिखी है।
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152 सालों से कपाट खुलने से बंद होने तक मंदिर में नित्य सुबह-शाम जो आरती गाई जाती है, उसे एक मुस्लिम शायर ने लिखा है और वह शायर है चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी फकरुद्दीन (बदरुद्दीन)।
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बदरुद्दीन ने यह आरती वर्ष 1865 में लिखी थी । जब से ये आरती लिखी गई है तब से भगवान बद्री विशाल की पूजा परंपराओं की शुरुआत इसी आरती के साथ होती है। जब ये आरती फकररुद्दीन ने लिखी थी तब उनकी उम्र महज 18 साल थी। इस आरती में बदरीनाथ धाम के धार्मिक महत्व के अलावा यहां की सुंदरता का भी वर्णन किया गया है।