क्या आप जानते है कि 18 मार्च का दिन बेहद खास और शुभ है। जानिए क्यों?
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शुभ मुहूर्त
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5 मार्च से सभी के रुके हुए कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा। होली जलने के साथ ही जनवरी से चले आ रहे अग्नि पर्वों का समापन हो गया है। अब होलाष्टक के कारण रुके हुए विवाह आदि मांगलिक कार्य भी पांच मार्च से शुरू हो जाएंगे।
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बसंत ऋतु
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नवसवत्सर 18 मार्च से प्रारंभ होगा और देश भर में नया वर्ष मनाया जाएगा। वसंत ऋतु का आगमन 14 मार्च को होगा। अग्नि पर्वों का शुभारंभ लोहड़ी एवं मकर संक्रांति की आग से होता है और होली दहन से समापन हो जाता है। इस बीच अनेक पर्व होते हैं।
गुड़ और तिल का इन पर्वों से विशेष संबंध है। होली के साथ ही तिल से बने पदार्थों को सेवन भी समाप्त हो जाता है। होली बीतते ही बसंत ऋतु के आगमन की आस लगती है। अभी तक शिशिर ऋतु चल रही है। इस ऋतु में पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ते हैं और नई कोपलें निकल आती हैं।
पेड़ों पर छोटे और नए पत्ते निकलकर अपनी खुशबू बिखेरते हैं। इसी के साथ नए फूलों का खिलना भी शुरू हो जाता है। 14 मार्च को शिशिर ऋतु का समापन हो जाएगा तथा दो महीने चलने वाली बसंत ऋतु आएगी।