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ये थी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शान की सवारी, तस्वीरों में देंखें...

Sat, 18 Aug 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 18 Aug 2018 10:30 AM IST
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atal bihari vajpayee death vajpayee was travelling in these vehicle
atal bihari vajpayee - फोटो : amar ujala

अपने काम के प्रति अटल बिहारी वाजपेयी इस कदर समर्पित थे कि बड़े से बड़े ओहदे पर होने के बाद भी उन्होंने कभी सुविधाओं की ओर मुंह नहीं ताका। काम के समय उन्हें स्कूटर मिला तो स्कूटर से घूमे और बस या ट्रेन छूट गई तो वह ट्रक में सवार हो गए।


 

atal bihari vajpayee death vajpayee was travelling in these vehicle
ajay bhatt - फोटो : amar ujala

ऐसे दो दिलचस्प किस्से सादगी और समर्पण की कहानी बयान करते हैं। पहला वाकया उनकी कुमाऊं यात्रा से जुड़ा है। यह किस्सा कोई और नहीं खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने सुनाया है। बकौल भट्ट, उन दिनों हल्द्वानी से रात्रि बस सेवा नहीं थी।
 

atal bihari vajpayee death vajpayee was travelling in these vehicle
atal bihari vajpayee

वाजपेयी जी पहाड़ से यात्रा कर जब हल्द्वानी पहुंचे तो दिल्ली की बस छूट चुकी थी। रात में कोई और बस नहीं थी। सभी नेताओं ने उनसे वहीं रात्रि विश्राम करने का आग्रह किया, लेकिन पार्टी की दिल्ली में अहम बैठक थी। उन्हें हर हाल में उसमें शामिल होना था। वे दिल्ली जा रहे एक ट्रक में सवार हो गए। पार्टी के प्रति वह इस कदर समर्पित थे कि भूल गए कि ट्रक से यात्रा करने में उन्हें बहुत असुविधा हो सकती है।
 

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atal bihari vajpayee

दूसरा संस्मरण देहरादून के मित्तल परिवार से जुड़ा है। भाजपा नेता पुनीत मित्तल बताते हैं कि अटल जी पार्टी में बड़े से बड़े ओहदे पर रहे और उनके घर पर ठहरे। उन्हें याद है कि देहरादून प्रवास के दौरान जब भी उन्हें किसी कार्यकर्ता से मिलने की इच्छा होती तो पिताजी के साथ स्कूटर में बैठकर निकल पड़ते। उस जमाने में एक फिएट कार होती थी, जिसमें वे लंबी यात्रा करते थे। 
 

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atal bihari vajpayee

पुनीत मित्तल बताते हैं कि अस्सी के दशक में एक बार अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून आए। उन्हें राजपुर स्थित पटेल पार्क में जनसभा को संबोधित करना था। पिताजी के साथ कार में बैठकर वे सभा स्थल के लिए रवाना हुए। कार, चाचा जी चला रहे थे। कार रास्ते में खराब हो गई। तब अटल जी कार से उतरे और पिताजी के साथ कार को धक्का लगाने लगे। उन्हें यह किस्सा पिताजी ने सुनाया था।

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