अपने काम के प्रति अटल बिहारी वाजपेयी इस कदर समर्पित थे कि बड़े से बड़े ओहदे पर होने के बाद भी उन्होंने कभी सुविधाओं की ओर मुंह नहीं ताका। काम के समय उन्हें स्कूटर मिला तो स्कूटर से घूमे और बस या ट्रेन छूट गई तो वह ट्रक में सवार हो गए।
ये थी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शान की सवारी, तस्वीरों में देंखें...
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ऐसे दो दिलचस्प किस्से सादगी और समर्पण की कहानी बयान करते हैं। पहला वाकया उनकी कुमाऊं यात्रा से जुड़ा है। यह किस्सा कोई और नहीं खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने सुनाया है। बकौल भट्ट, उन दिनों हल्द्वानी से रात्रि बस सेवा नहीं थी।
वाजपेयी जी पहाड़ से यात्रा कर जब हल्द्वानी पहुंचे तो दिल्ली की बस छूट चुकी थी। रात में कोई और बस नहीं थी। सभी नेताओं ने उनसे वहीं रात्रि विश्राम करने का आग्रह किया, लेकिन पार्टी की दिल्ली में अहम बैठक थी। उन्हें हर हाल में उसमें शामिल होना था। वे दिल्ली जा रहे एक ट्रक में सवार हो गए। पार्टी के प्रति वह इस कदर समर्पित थे कि भूल गए कि ट्रक से यात्रा करने में उन्हें बहुत असुविधा हो सकती है।
दूसरा संस्मरण देहरादून के मित्तल परिवार से जुड़ा है। भाजपा नेता पुनीत मित्तल बताते हैं कि अटल जी पार्टी में बड़े से बड़े ओहदे पर रहे और उनके घर पर ठहरे। उन्हें याद है कि देहरादून प्रवास के दौरान जब भी उन्हें किसी कार्यकर्ता से मिलने की इच्छा होती तो पिताजी के साथ स्कूटर में बैठकर निकल पड़ते। उस जमाने में एक फिएट कार होती थी, जिसमें वे लंबी यात्रा करते थे।
पुनीत मित्तल बताते हैं कि अस्सी के दशक में एक बार अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून आए। उन्हें राजपुर स्थित पटेल पार्क में जनसभा को संबोधित करना था। पिताजी के साथ कार में बैठकर वे सभा स्थल के लिए रवाना हुए। कार, चाचा जी चला रहे थे। कार रास्ते में खराब हो गई। तब अटल जी कार से उतरे और पिताजी के साथ कार को धक्का लगाने लगे। उन्हें यह किस्सा पिताजी ने सुनाया था।