पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को होगा। उनकी की मौत पर 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। वाजपेयी कई बार उत्तराखंड आए, लेकिन फिर भी उनकी ये दिली तमन्ना अधूरी रह गई।
अधूरी रह गई पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ये दिली तमन्ना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी टनकपुर से होते हुए 10 नवंबर 1981 को सड़क मार्ग से चंपावत और लोहाघाट पहुंचे। दोनों जगहों पर जनसभाएं हुई, मगर उनकी लोहाघाट के पास मायावती अद्वैत आश्रम के दर्शन करने की हसरत अधूरी रही। पूर्व विधायक और भाजपा नेता केसी पुनेठा बताते हैं कि लोहाघाट में वक्त कम होने से वे मायावती आश्रम नहीं जा सके, लेकिन दोबारा यहां आने पर मायावती आश्रम आने की बात कह गए थे, मगर दोबारा नहीं आए।
10 नवंबर को चंपावत मोटर स्टेशन और लोहाघाट के रामलीला मैदान में डेढ़ साल पहले स्थापित पार्टी के संगठन को मजबूत करने का वे आह्वान कर गए। चंपावत में अमरनाथ वर्मा, श्याम नारायण पांडेय, जगदीश जोशी, दिलीप सिंह मेहता सहित कई नेताओं ने उनकी अगवानी की थी।
बताते हैं कि उनकी ओजपूर्ण वाणी के आम लोग भी कायल हुए। लोहाघाट में स्टेशन से खड़ी बाजार होते हुए जुलूस की शक्ल में रामलीला मैदान पहुंचे। तब भाजयुमो के तत्कालीन जिला महामंत्री और पूर्व विधायक केसी पुनेठा ने कार्यक्रम की कमान संभाली थी। बताते हैं कि लोहाघाट की खूबसूरती पर वे खासे फिदा थे। जनसभा के बाद वाजपेयी स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय गए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यादें टनकपुर से भी जुड़ी हैं। वर्ष 1981 में पिथौरागढ़ जाते वक्त टनकपुर में रुके पूर्व प्रधानमंत्री को न चाहते हुए भी भीड़ बढ़ने पर जनसभा भी करनी पड़ी थी। उन्होंने टनकपुर को मानसरोवर यात्रा का प्रवेश द्वार बताते हुए मां पूर्णागिरि धाम के विकास पर जोर दिया था।