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Astrology: परीक्षा में चाहिए अच्छे अंक तो उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पढ़ें, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र
परीक्षा में अच्छे अंक लाने हैं तो छात्रों को आग्नेय कोण में उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पढ़ना चाहिए। वास्तुविद् पंडित सतीश शर्मा ने छात्रों को पढ़ाई के लिए वास्तु शास्त्र के टिप्स देते हुए यह बात कही। उन्होंने वास्तु को लेकर लोगों की जिज्ञासाओं को दूर किया।
वास्तुकार पंडित सतीश शर्मा ने कहा कि छात्रों का पढ़ाई वाला कमरा पश्चिम दिशा की ओर हो। नया शोध का विषय है कि पश्चिम और उत्तर दिशा में पढ़ने वालों में टॉप कौन करेगा। यदि किसी का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है तो वह दक्षिण दिशा के कमरे में बैठकर उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पढ़ाई करे।
शरीर की ऊर्जा में ही छिपा है राज
ज्योतिष महाकुंभ में आए ऊर्जा वास्तु एवं पैरानॉर्मल कंसलटेंट डॉ. अनिल वत्स ने वैज्ञानिक तरीकों से लोगों का भविष्य देखा। उन्होंने कहा कि शरीर की ऊर्जा में ही हर व्यक्ति का पूरा राज छिपा होता है। उन्होंने मशीनों से स्कैनिंग करने के बाद लोगों को उनकी तस्वीर से ऊर्जा का स्तर और आभामंडल बताया।
जिन लोगों का आभामंडल 50 प्रतिशत से कम आया, उन्हें वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीकों से इसे बढ़ाने के तरीके भी सुझाए। उनका कहना है कि अगर किसी का आभामंडल 50 प्रतिशत से कम होता है तो वह बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। कोई नकारात्मक ऊर्जा उन्हें किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचा सकती है।
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वास्तुकार पंडित सतीश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वेदों में पूरे ब्रह्मांड का रहस्य समाया है, इस रहस्य को जानने के लिए ज्योतिष शास्त्र को जानना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री सोमवार को पांचवें अमर उजाला-ग्राफिक एरा ज्योतिष महाकुंभ के समापन समारोह में बोल रहे थे।
आचार्य इंदु प्रकाश की उत्तराखंड में अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग पर मुख्यमंत्री धामी ने विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उत्तराखंड ज्योतिष परिषद का भी गठन किया है, जिससे हमारी भावी पीढ़ी भी इस विज्ञान का लाभ उठाए।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित महाकुंभ में शामिल हुए 83 ज्योतिषाचार्यों को सीएम धामी ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में ज्योतिष शास्त्र का पुराना इतिहास रहा है। देवभूमि ज्योतिष, धर्म, आध्यात्म, संस्कृति एवं वेदों की भूमि है। यहां अनेक ऋषि-मुनियों एवं हमारे पूर्वजों ने यज्ञ किए, ज्ञान-विज्ञान का संदेश दिया।
कहा कि भारत की महान भूमि ज्ञान, कर्म, उपासना के साथ-साथ लौकिक और अलौकिक विधाओं और रहस्यों को उजागर करने वाली भूमि है। ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा नेत्र है जो भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों काल को देख सकता है। यह शास्त्र भौतिक, आध्यात्मिक और दैविक विचारों का समन्वय है।
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