18वें एशियाई खेलों में भारत को रजत पदक दिलाने वाले दीपक कुमार का द्रोणनगरी से बेहद खास रिश्ता है। या यूं कहें कि यहीं पर रहते हुए उन्होंने शूटिंग के गुर सीखे। दीपक कुमार वर्ष 2001 से 2007 तक पौंधा स्थित श्रीमद् दयानन्द आर्ष ज्योतिर्मठ गुरुकुल के छात्र रहे।
एशियन गेम्स 2018: भारत को रजत पदक दिलाने वाला ये खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए रोज 12 किमी. चलता था पैदल
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शास्त्रों, वेदों, पुराणों और उपनिषदों का ज्ञान रखने वाले दीपक धारा प्रवाह संस्कृत बोलते हैं। उन्होंने गुरुकुल में रहते हुए ही शूटिंग सीखना प्रारंभ किया। यहां बनी शूटिंग रेंज में वह घंटों निशाने की प्रेक्टिस किया करते थे। इसके बाद वर्ष 2004 में वह गुरुकुल टीम का हिस्सा बन गए। वर्ष 2007 में गुवाहाटी में संपन्न हुए 33वें नेशनल गेम्स में उन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया।
2008 में उनका चयन एयर फोर्स शूटिंग टीम के लिए हुआ। वर्तमान में एयर फोर्स में रहते हुए वह भारतीय शूटिंग टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं। दीपक राष्ट्रमंडल खेल में भी हिस्सा ले चुके हैं। साथ ही विश्व शूटिंग चैंपियनशिप प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर उन्होंने कई पदक हासिल किए हैं। 05 नवंबर 1987 को जन्में दीपक मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। उनके पिता राजकुमार किसान हैं। जबकि, माता गृहणी हैं। दीपक अब भी गुरुकुल आकर एक-एक महीने तक योगाभ्यास करते हैं।
मालूम हो कि दीपक कुमार ने एशियन गेम्स 2018 मे भारत को तीसरा पदक दिलवाया है। सोमवार को जकार्ता में 30 वर्षीय निशानेबाज ने 10 मीटर एयर राइफल में सिल्वर मेडल जीता। दीपक 247.7 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि, चीन के होरन येंग ने एशियन गेम्स के रिकॉर्ड 249.1 के साथ गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में एक समय ऐसा भी आया जब दीपक बाहर होने की कगार पर थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अच्छा प्रदर्शन कर ताइवान के लु शाओचुआन को मात देते हुए रजत पर कब्जा जमाया।
गुरुकुल में शूटिंग का अभ्यास पूरा करने के बाद दीपक ने तैयारी जारी रखने के लिए जसपाल राणा शूटिंग रेंज में प्रवेश किया। लेकिन साधन नहीं होने के कारण उन्हें अभ्यास के लिए रेंज तक की 12 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। इस दौरान उनके एक हाथ में 15 किलो की एयर राइफल होती थी और पीठ पर 10 किलो की राइफल किट। रोजाना इसी तरह वह गुरुकुल से शूटिंग रेंज जाते थे। जीत हासिल करने के बाद दीपक कुमार ने कहा कि ‘हर कोई यह सोचता है कि उसे क्या मिलेगा। मैनें अपने गुरुकुल में सीखा है कि आपको आपका हिस्सा मिल ही जाएगा। दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है। जिंदगी बहुत छोटी है।’