देश विदेश में अलग पहचान रखने वाली तीर्थनगरी ऐसे ही विश्व में विख्यात नहीं है। मां गंगा की कृपा ऐसी है कि देश-विदेश से जो भी पर्यटक यहां आता है वह यहीं के रंग में रंग जाता है। ऐसी ही कुछ कहानी साध्वी भगवती की भी रही। वह अमेरिका से भारत भ्रमण पर आईं थी।
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साध्वी भगवती
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पहुंचने के बाद गाइड ने जिन शहरों का नाम बताया, उनमें ऋषिकेश सबसे पहला था। फिर तय हुआ कि वहां चलकर राफ्टिंग का लुत्फ उठाया जाए। यहां आने के बाद प्राकृतिक और आध्यात्मिक छटा ने ऐसी छाप छोड़ी कि 25 वर्षीय लड़की ने गंगा को मां और भारत को अपना घर मान लिया। साथी पर्यटकों ने होटल में रहना पसंद किया लेकिन वह इकलौती लड़की थीं जिन्होंने परमार्थ निकेतन को ठिकाना बनाया।
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साध्वी भगवती
- फोटो : अमर उजाला
आज वही लड़की देश ही नहीं दुनिया भर में साध्वी भगवती के नाम से प्रख्यात हो चुकी हैं। 1996 में साध्वी भगवती जब साइकोलॉजी में ग्रेजुएट की छात्रा थीं, तब वह भारत घूमने आईं थी। घूमते हुए वह परमार्थ निकेतन पहुंचीं। यहां का वातावरण और गंगा की प्राकृतिक शोभा देख उन्होंने यहीं बस जाने का निश्चय कर लिया।
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साध्वी भगवती
- फोटो : अमर उजाला
साध्वी भगवती बताती हैं कि जब वह परमार्थ निकेतन पहुंचीं तो लगा कि जिस स्थान की उन्हें तलाश थी वह स्थान यही है। उन्होंने स्वामी चिदानंद से निकेतन में रहने की अनुमति मांगी तो उन्होंने कहा कि ये तुम्हारा घर है। स्वामी चिदानंद सरस्वती की सलाह पर ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दोबारा वर्ष 2000 में ऋषिकेश आईं तो संन्यास दीक्षा ली और नया नाम साध्वी भगवती मिला।
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साध्वी भगवती
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
साध्वी भगवती ने काम के प्रति अपनी निष्ठा और रचनाधर्मिता की बदौलत अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मूर्त रूप दिया। आज साध्वी भगवती की देखरेख में दुनियाभर के करीब 200 से ज्यादा देश योग दिवस में प्रतिभाग करते हैं। ये दुनिया भर के सबसे बड़े आयोजनों में शुमार होता है। पर्यावरण और योग के क्षेत्र में वैश्विक प्रयासों के चलते ही उन्हें ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस का महासचिव बनाया गया है। इसके सदस्य देशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रहा रही है।