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गणेश चतुर्थी 2026: देहरादून में प्राकृतिक रंगों से सज रहे गणपति बप्पा, गोबर से बनी मूर्तियों की बढ़ी मांग

Sun, 13 Sep 2026 06:45 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 13 Sep 2026 06:45 PM IST
सार

गोबर और कच्ची मिट्टी से बने दियों की मांग भी बढ़ रही है। आठ से 13 इंच आकार की मूर्तियों की सबसे अधिक बिक्री हुई है। इन मूर्तियों को बनाने में महिलाओं ने गर्मियों के दौरान मेहनत की थी।

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Ganesh Chaturthi 2026 demand for cow-dung Lord Ganesha idol has risen adorned with natural colors
गणेश चतुर्थी पर सजी बप्पा की मूर्तियां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

गणेश चतुर्थी के लिए गोबर और कच्ची मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां खूब पसंद की जा रही हैं। स्वदेश कुटुंब समूह ने मूर्तियां तैयार की हैं। इनकी कीमत 500 से 1100 रुपये तक है।

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समूह की अध्यक्ष तृप्ति थापा ने बताया कि आठ से 13 इंच आकार की मूर्तियों की सबसे अधिक बिक्री हुई है। इन मूर्तियों को बनाने में महिलाओं ने गर्मियों के दौरान मेहनत की थी। गोबर और कच्ची मिट्टी से बने दियों की मांग भी बढ़ रही है। मूर्तियां प्राकृतिक रंगों से रंगी जाती हैं। ये रंग हल्दी, चुकंदर और रोली जैसी प्राकृतिक चीजों से खुद बनाए जाते हैं।
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इन मूर्तियों की मांग देहरादून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी से भी है। समूह की महिलाएं कूरियर के माध्यम से इन्हें पहुंचा रही हैं। ये प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती हैं। यह प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों से अलग है, जो विसर्जन के समय नहीं घुलतीं।
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जोधपुर में गणेश प्रतिमाओं की परंपरा

जोधपुर के मूर्तिकार संजय राजपूत भी गणेश मूर्तियां तैयार करते हैं। वह पिछले 12 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। पहले उनके पिता यह काम किया करते थे। अब संजय राजपूत इस पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

पर्यावरण अनुकूलता और प्राकृतिक रंग

इन मूर्तियों की मुख्य विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। ये गोबर और कच्ची मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्वों से बनी हैं। इनमें हल्दी, चुकंदर और रोली जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है। विसर्जन के समय ये पानी में आसानी से घुल जाती हैं। यह पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।

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