सरकार हमें मौका दे। हम आतंकियों को प्यार से समझाएंगे। जैसे उनके बच्चे हैं, वैसे ही हमारे भी बेटे हैं। यह खून-खराबा कब तक चलेगा। शहीद मेजर विभूति को गोद में खिलाने वाली शोभा जोशी इस शहादत से बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि जब किसी मां की कोख उजड़ती है तो इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता।
शोभा जोशी डिफेंस कालोनी मेें रहती हैं। उनका एक बेटा गिरित्र जोशी ले. कर्नल है। शहीद मेजर विभूति शंकर के घर पहुंचकर उनके जेहन में विभूति की बचपन की यादें ताजा हो गई। जब विभूति छोटा सा था तो इस आंगन में वह किराएदार थीं। विभूति की शरारतें दिल को लुभाती थीं। उनका बेटा भी विभूति के साथ खूब खेलता था। वह विभूति को गोद में खिलाती थी।
जिस आंगन में विभूति को खेलते, शरारतें करते देखा, आज उसी आंगन से उसे विदा होता देखकर शोभा की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बोले जा रही थी, हमारे बच्चे...आखिर कब तक? फिर सवाल किया, कब तक चलेगा यह खून-खराबा?
उनकी निगाहें अमर उजाला संवाददाता की ओर थी। फिर बोली, तुम भी मेरे बेटे हो। जो गया है, वह भी मेरा बेटा था। एक बेटा फौज में लेफ्टिनेंट कर्नल है। हमारे बेटे लगातार शहीद हो रहे हैं। क्यों न सरकार हमें कश्मीर भेजे? उनकी यह बात सकपकाने वाली थी। आसपास खड़े लोग उनकी बात को समझने की कोशिश कर ही रहे थे कि वह फिर बोली...बेटा, हम कश्मीर जाएंगे। सभी फौजियों की मां कश्मीर जाएंगी।
उन्हें समझाएंगी। जिस तरह वह किसी मां के बेटे हैं, उसी तरह हमारे भी बेटे हैं। हम नहीं चाहते किसी भी मां की कोख उजड़े। हम आतंकियों को मोहब्बत, मां के लहजे में समझाएंगे। हो सकता है कि उन्हें हमारी बात पसंद आ जाए और वह खून-खराबा छोड़कर अमन की राह पर चल पड़ें।