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उत्तराखंड में बड़ा घोटाला, फर्जी डिग्री से नौकरी कर रहे 5000 टीचर

Wed, 29 Mar 2017 10:05 AM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 29 Mar 2017 10:05 AM IST
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5000 teacher working with fake degree in uttarakhand
श‌िक्षक - फोटो : demo

प्रदेश के शासकीय और अशासकीय स्कूलों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक अध्यापन कार्य कर रहे हैं, जिनके शैक्षिक प्रमाण पर या तो पूरी तरह फर्जी अथवा उत्तराखंड में मान्य नहीं हैं। हाल ही फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे 41 टीचर पकड़े जाने पर अमर उजाला ने गहराई से पड़ताल की तो संकेत मिले हैं कि शासकीय और अशासकीय स्कूलों दोनों में ऐसे टीचरों की संख्या पांच हजार तक हो सकती है। हाल ही एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने शिक्षा विभाग को 217 टीचरों के नामों की सूची सौंपते हुए इनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की मांग की है।


 

5000 teacher working with fake degree in uttarakhand

खबर है कि शिक्षा विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों का एक कॉकस है, जो ऐसे लोगों की नौकरी लगवाने के गोरखधंधे में लंबे समय से लिप्त है। राज्य के कई जिलों में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज पर नौकरी कर रहे टीचरों के पकड़े जाने पर शिक्षा विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई न होना इस संदेह को बल देता है। अब तक सामने आए मामलों में आरोपी टीचरों ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और बिहार आदि राज्यों से बनवाए गए फर्जी प्रमाण पत्र हासिल किये थे। कई ऐसे टीचर भी हैं, जो भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, महिला ग्राम विद्यापीठ प्रयाग(उप्र), जैसे कई गैरमान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की डिग्री पर नौकरी कर रहे हैं।
 

5000 teacher working with fake degree in uttarakhand
- - फोटो : .

अमर उजाला का मानना है कि अगर शिक्षकों के दस्तावेजों की प्रदेश स्तर पर व्यापक जांच हो तो न केवल शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे संगठित गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है, बल्कि फर्जी डिग्री पर छात्रों का भविष्य चौपट कर रहे टीचरों से भी शिक्षा विभाग को निजात मिलेगी। प्रदेश में 12511 प्राथमिक, 2957 उच्च प्राथमिक और 1238 इंटरमीडिएट कालेज हैं, इन स्कूलों में 71486 टीचर हैं, वहीं अशासकीय विद्यालयों में लगभग 20 हजार टीचर हैं। बेसिक शिक्षा में नियुक्तियां मेरिट के आधार पर होती है, अभ्यर्थी अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र दिखाते हैं और इसके आधार पर नियुक्तियां पा जाते हैं, उनके प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं होता न ही लिखित परीक्षा होती है। वहीं अशासकीय स्कूलों में शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन की सांठगांठ से नियुक्तियां होती रही हैं। दून निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट रहमत अली ने शिक्षा महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को लगभग 217 टीचरों के नामों की सूची सौंपते हुए इनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की मांग की।
 

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5000 teacher working with fake degree in uttarakhand
टीचर - फोटो : demo pic

आरोप है कि कई टीचर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पा चुके हैं। जांच के साथ ही इन टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र मांगे गए, लेकिन विभाग की ओर से मामले की अनदेखी की गई। मामला सूचना आयोग पहुंचा तो आयोग ने इसे गंभीर प्रकरण बताते हुए शिक्षा निदेशालय को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। आयोग के निर्देश के बाद अब विभाग हरकत में तो आया है, मगर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं नजर आई। पिछले दिनों फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज पर काम करने के जितने भी मामले पकड़े गए हैं, उसमें केवल टीचरों के खिलाफ कार्रवाई हई है। विभाग के ही लोग सवाल उठाते हैं कि क्या विभाग के लोगों के मिलीभगत के बिना ऐसा संभव है ? वे ही जवाब देते हैं कि शिक्षा विभाग में कॉकस सक्रिय है, चूंकि यह कॉकस सत्ता मैं बैठे और अन्य प्रभावशाली लोगों के परिजनों, परिचितों  को फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टीचर बनवा देता है, लिहाजा उनका कुछ नहीं बिगड़ता। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो तभी यह फर्जीवाड़ा रुकेगा। 
 

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स्कूल टीचर - फोटो : demo pics

फर्जी दस्तावेज पर नौकरी करने के आरोप में अब तक पकड़े गए कुछ टीचर तो पिछले 19 साल से बच्चों को पढ़ा रहा थे। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद जांच में चिड़ियापुर  जिला हरिद्वार के छिद्दू सिंह के इक्का दुक्का नहीं बल्कि समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। रसूलपुरगोट बहादराबाद के विजेंद्र सिंह, प्राथमिक विद्यालय चमारिया बहादराबाद के गीताराम,राजकीय प्राथमिक विद्यालय टाटवाल के चंद्रपाल सिंह, रायसी लक्सर के यतेंद्र सिंह, प्राथमिक विद्यालय मंगोलपुरा के ऋषिपाल सहित 26 टीचरों के छह फरवरी 2016 से अब तक की जांच में बीटीसी के प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। इसके अलावा सरकारी माध्यमिक विद्यालयों एवं अशासकीय विद्यालयों में हुई नियुक्तियों में भी फर्जीवाड़ा सामने आया है।
 

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