आईपीएल सीजन-11 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में शार्दुल ठाकुर की 15 रन की यादगार और कीमती पारी को शायद ही कोई भूल पाए। 5 गेंदों में तीन चौकों की मदद से बनाए उनके 15 रन की बदौलत चेन्नई सुपरकिंग्स ने फाइनल में प्रवेश कर लिया है।
शार्दुल ठाकुर के लिए साल 2018 काफी शुभ रहा है। श्रीलंका में इसी साल खेली गई निदाहास ट्रॉफी में लाजवाब प्रदर्शन के बाद आईपीएल में दो साल बाद वापसी करने वाली चेन्नई सुपरकिंग्स को भी उन्होंने चैंपियन बनने की राह पर ला खड़ा किया है। हालांकि कुछ साल पहले तक मुंबई का यह गुमनाम क्रिकेटर कामयाबी की चमक से कोसों दूर था। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी 10 खास बातें...
शार्दुल ठाकुर का जन्म 16 अक्टूबर 1991 को महाराष्ट्र के पालघर में हुआ था। उनके पिता का नाम नरेंद्र है और वो नारियल का उद्योग करते है। स्कूल में क्रिकेट खेलते वक्त शार्दुल ने छह गेंदों में 6 छक्के लगाए थे।
रणजी ट्रॉफी में शार्दुल मुंबई की तरफ से खेलते हैं। नवंबर 2012 में उन्होंने प्रथम श्रेणी का पहला मैच राजस्थान के खिलाफ जयपुर में खेला था। करियर में जितनी अच्छी शुरुआत उन्हें मिलनी चाहिए थी उतनी मिली नहीं।
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शार्दुल ठाकुर
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शार्दुल ने बड़ी मुसीबतों के साथ क्रिकेट खेला है। वह क्रिकेट खेलने के लिए पालघर से रोजाना मुंबई की लोकल ट्रेन में लटककर जाते थे। सुबल 7.30 बजे मैदान पर पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना सुबह 3.30 बजे उठना पड़ता था और चार बजे की लोकल ट्रेन पकड़नी होती थी।
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शार्दुल ठाकुर
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क्रिकेट में जरा सी चमक मिलने के बाद यह तेज गेंदबाज 'पालघर एक्सप्रेस' के नाम से लोकप्रिय हो गया। बता दें कि पिछले साल दिसबंर में टीम इंडिया के लिए खेलने के बाद जब वह मुंबई की उसी लोकल ट्रेन से घर के लिए रवाना हो रहे थे, तब इस खिलाड़ी को किसी ने नहीं पहचाना था।