विश्व क्रिकेट के सबसे विस्फोटक सलामी बल्लेबाजों में शुमार पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग का खेल पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की कप्तानी में निखरा। गांगुली ने ही सहवाग की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पारी ओपन करने की कमान सौंप दी। इसके बाद से सहवाग छा गए। उनके ताबड़तोड़ अंदाज के सामने विश्व के दिग्गज गेंदबाजों ने भी अपने हथियार डाल दिए, लेकिन सहवाग की सफलता में जितना हाथ गांगुली का है उतना ही सचिन तेंदुलकर का भी है।
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अजय रात्रा
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भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज रहे अजय रात्रा ने बताया कि किस तरह से सचिन ने टीम के लिए अपने पसंदीदा क्रम ओपनिंग को त्याग दिया था। हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में अजय रात्रा ने बताया कि उस समय सचिन बतौर ओपनर बेहतरीन लय में थे, लेकिन सहवाग को पारी की शुरुआत करनी थी। इसी वजह से सचिन को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का प्रस्ताव दिया गया।
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सचिन-सहवाग-गांगुली
- फोटो : social media
सहवाग ने सौरव गांगुली के साथ पारी की शुरुआत की। दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों की रणनीति के तहत दोनों ने पारी की कमान संभाली थी। रात्रा ने कहा कि अगर सचिन नंबर चार पर खेलने के लिए तैयार नहीं होते, तो सहवाग मध्यक्रम में ही बल्लेबाजी करते। सचिन ने सहवाग के लिए अपने क्रम को छोड़ा और उसके बाद वीरू का असली खेल दुनिया के सामने आया।
26 जुलाई 2001 को न्यूजीलैंड के खिलाफ सौरव ने सहवाग से ओपनिंग कराने का जोखिम भरा फैसला लिया था। बतौर ओपनर सहवाग ने पावरप्ले में बल्लेबाजी की परिभाषा ही बदल डाली। वो पहली ही गेंद से विपक्षी गेंदबाजों पर टूट पड़ते। पहली बार ओपनिंग करते हुए सहवाग ने 33 गेंद पर 54 रन की पारी खेली थी। हालांकि यह मैच भारत हार गया था, लेकिन सचिन के त्याग ने दुनिया के सामने सहवाग के विस्फोटक अंदाज को दिखा दिया। सचिन का मध्यक्रम में खेलने के फैसला गलत साबित नहीं हुआ।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : ट्विटर
दो मैच के बाद ही सहवाग ने महज 70 गेंदों में ही शतक जड़ दिया। इसके बाद सचिन ने चोट से उबरकर वापसी की और सहवाग वापस नीचले क्रम पर पहुंच गए। कुछ समय बाद इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में सहवाग को दोबारा ओपनिंग करने का मौका मिला और उस सीरीज में उन्होंने जमकर रन बनाए। उन्होंने अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी से बता दिया कि ओपनिंग के असली दावेदार वही हैं। बाद में टीम को संतुलन की जरूरत पड़ी और नए बल्लेबाजों को टीम में जगह मिली। इसके बाद सचिन ने ओपनिंग के क्रम पर वापसी की और सहवाग के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाया।