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मैदान पर लिए गए धोनी के चार फैसले, जिसने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Tue, 31 Mar 2020 03:09 PM IST
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ms dhoni
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दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में शुमार टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास की अटकलों का बाजार एक बार फिर से गर्म हो गया है। चर्चा चल रही है कि धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया है। आईपीएल के टलने से पहले धोनी इसकी तैयारियों में जुटे थे। माना जा रहा था कि यह लीग धोनी के लिए एक बार फिर से भारतीय टीम का दरवाजा खोलेगी। लेकिन आईपीएल को कोरोना वायरस के चलते 15 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया। धोनी कब-क्या फैसला लेंगे ये शायद उनके अलावा कोई और नहीं जानता, जैसे वो मैदान में भी अपने फैसलों से सभी को चौंका देते थे।
आईसीसी के सभी टूर्नामेंट जीतने वाले एमएस दुनिया के इकलौते कप्तान हैं। टी-20 विश्व कप, वन-डे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब उनकी झोली में शामिल हैं। आज जब धोनी के संन्यास के फैसले के बारे में बात हो रही है, तो क्यों ना हम मैदान पर लिए गए उनके कुछ फैसलों पर नजर डालें, जिसने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर को ही बदल कर रख दिया।
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2011 World Cup
2011 के वर्ल्ड कप के दौरान धोनी लय में नहीं थे, लेकिन फाइनल मुकाबले में वो युवराज सिंह से पहले नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने उतरे। जबकि युवराज ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान के बेहतरीन खेल दिखाया था। धोनी का यह फैसला सही साबित हुआ। भारतीय कप्तान ने 79 गेंदों पर नाबाद 91 रन बनाए जिसमें आठ चौके और दो छक्के शामिल थे। धोनी ने दबाव में बेहतरीन पारी खेली और भारतीय टीम को 275 रन के लक्ष्य तक पहुंचाकर विश्व चैंपियन बनाया।
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जोगिंदर शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
भारत ने 2007 विश्व टी-20 के फाइनल में पाकिस्तान को 158 रनों का लक्ष्य दिया था। पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रनों की दकरकार थी और धोनी ने जोगिंदर शर्मा के हाथों में गेंद सौंप दी। जोगिंदर शर्मा ने कमाल दिखाते हुए मिस्बाह-उल-हक का विकेट चटकाकर लक्ष्य का बचाव किया। भारत पांच रन से फाइनल जीत टी-20 का पहला विश्व चैंपियन बना था। अनुभवहीन शर्मा पर भरोसा करने का धोनी का निर्णय एक मास्टरस्ट्रोक था।
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रोहित शर्मा और एमएस धोनी
- फोटो : फाइल फोटो
रोहित शर्मा एकदिवसीय में मध्यक्रम में खेलते हुए लगातार असफल हो रहे थे। धोनी ने उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा और उसके बाद तो रोहित ने बतौर ओपनर तूफान ही मचा दिया। रोहित ने अपने एकदिवसीय करियर में तीन दोहरे शतक लगाए हैं और यह उपलब्धि हासिल करने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं।
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रवींद्र जडेजा
- फोटो : सोशल मीडिया
मुरली विजय, रविंद्र जडेजा और सुरेश रैना के शुरुआती दिनों में खराब प्रदर्शन के बावजूद भी धोनी ने इन खिलाड़ियों को बैक किया और भरोसा जताया। तीनों ही खिलाड़ियों ने धोनी की उम्मीद पर पानी नहीं फेरा। विजय ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के रूप में खुद को साबित किया और रैना काफी समय तक भारतीय मध्यक्रम का अहम हिस्सा रहे। जडेजा अब तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम का एक अहम हिस्सा हैं।
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