दोस्ती एक खूबसूरत एहसास है। जहां पर दो अलग - अलग शख्स एक दूसरे के लिए जान तक देने के लिए तैयार हो जाते हैं। कहते हैं दोस्ती से कोई रिश्ता शुरू किया जाए तो उसकी नीव मजबूत होती है। आज फ्रेंडशिप डे है। इस मौके पर आपको कुछ ऐसे दोस्तों की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने खून का रिश्ता ना होते भी एक दूसरे के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया है। सरहदों की दीवार तोड़कर दूसरों की मदद की है। इसी बदौलत आज इनकी दोस्ती की मिशाल दी जाती है।
फ्रेंडशिप डे स्पेशल : दोस्ती जो पार कर गई सरहदों की दीवार और बन गई मिसाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरहद की दीवार तोड़ बने दोस्त
गुरु ही नहीं साथी भी हैं
ऐसा नहीं कि दोस्ती का रिश्ता सिर्फ हम उम्र के साथ ही होता है। पिता और बेटी की उम्र का अंतर होने के बावजूद भी अच्छे दोस्त बन सकते हैं। निसबर्ड के निदेशक ऋषि राज सिंह हजारों बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं। इनके ट्रेनिंग लेने वाले छात्र इनको सिर्फ गुरु ही नहीं बल्कि एक अच्छा दोस्त भी मानते हैं। रशिया की ओलगा ने बताया कि डॉक्टर ऋषि राज सिंह अच्छे गुरु के साथ अच्छे दोस्त भी हैं। सभी छात्र इनको बहुत अच्छा दोस्त मानते हैं। घर की दिक्कत भी इनके साथ शेयर करते हैं। ये बच्चों की हर संभव मदद करने की कोशिश करते हैं। हर टीचर को ऐसा ही होना चाहिए। फ्रेंडशिप डे पर मैं सबसे पहले ऋषि राज सिंह को ही बधाई देती हूं।
वहीं खड़े ऋषि ने मेरी सारी बातें सुनी ली थीं और उसने आगे बढ़कर खुद अस्पताल जाकर ब्लड देने के लिए कहा। एक अनजान शख्स के ऐसा बोलने से मुझेउम्मीद जगी। ऋषि ने अस्पताल जाकर खून दिया। तब से हम दोनों की दोस्ती गहरी हो गई है। 2010 में हम दोनों एक ही जगह नौकरी करने लगे। अख्तर ने बताया कि ईद पर ऋषि मेरे घर आता है और दीपावली में मैं उसके घर जाता हूं। हम दोनों खुद को एक ही परिवार के मानते हैं।