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फ्रेंडशिप डे स्पेशल : दोस्ती जो पार कर गई सरहदों की दीवार और बन गई मिसाल

Sun, 07 Aug 2016 08:51 AM IST
नेहा शर्मा/अमर उजाला, नोएडा
नेहा शर्मा/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 07 Aug 2016 08:51 AM IST
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friendship day special story friendship beyond boundaries
friendship day - फोटो : अमर उजाला

दोस्ती एक खूबसूरत एहसास है। जहां पर दो अलग - अलग शख्स एक दूसरे के लिए जान तक देने के लिए तैयार हो जाते हैं। कहते हैं दोस्ती से कोई रिश्ता शुरू किया जाए तो उसकी नीव मजबूत होती है। आज फ्रेंडशिप डे है। इस मौके पर आपको कुछ ऐसे दोस्तों की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने खून का रिश्ता ना होते भी एक दूसरे के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया है। सरहदों की दीवार तोड़कर दूसरों की मदद की है। इसी बदौलत आज इनकी दोस्ती की मिशाल दी जाती है।

सरहद की दीवार तोड़ बने दोस्त

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अफगानिस्तान की मदिना अहमदी और गांबिया से गोंबी कुंबा अपना देश छोड़कर गौतमबुद्घ नगर की शारदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने केलिए आई हैं। पहली बार भारत आकर अकेला महसूस कर रही थी। गोंबी को हिंदी भाषा बोलने को लेकर भी बहुत दिक्कत होती थी। लोग इनकी भाषा को समझ ही नहीं पाते थे। लेकिन एक दिन कॉलेज की कैंटीन में चाय पीने के दौरान इनकी मुलाकात ज्योत्सना रॉय से हुई। आज ये दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं। ज्योत्सना ने सिर्फ इनको दिल्ली- एनसीआर घमाया है बल्कि हिंदी बोलना भी सिखा रही हैं। ताकि इनको आगे दिक्कत न हो। गोंबा ने बताया कि शुरूआत में भारत आकर बहुत अकेला महसूस कर रही थी। लेकिन जब से मदिना और ज्योत्सना से मुलाकात हुई है तब से ये अकेला पन दूर हो गया है। ज्योत्सना के परिवार के लोग भी हम लोगों को बहुत मानते हैं। हर त्योहार पर हम लोग ज्योत्सना के हर पर ही मनाते हैं। इस दौरान हमें भारतीय संस्कृति से भी रूबरू होने का मौका मिला है। शारदा यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल डिविजन के डायरेक्टर अशोक दरयानी ने बताया कि इन तीनों की दोस्ती पूरे यूनिवर्सिटी में मसूर है। 

गुरु ही नहीं साथी भी हैं

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ऐसा नहीं कि दोस्ती का रिश्ता सिर्फ हम उम्र के साथ ही होता है। पिता और बेटी की उम्र का अंतर होने के बावजूद भी अच्छे दोस्त बन सकते हैं। निसबर्ड के निदेशक ऋषि राज सिंह हजारों बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं। इनके ट्रेनिंग लेने वाले छात्र इनको सिर्फ गुरु ही नहीं बल्कि एक अच्छा दोस्त भी मानते हैं। रशिया की ओलगा ने बताया कि डॉक्टर ऋषि राज सिंह अच्छे गुरु के साथ अच्छे दोस्त भी हैं। सभी छात्र इनको बहुत अच्छा दोस्त मानते हैं। घर की दिक्कत भी इनके साथ शेयर करते हैं। ये बच्चों की हर संभव मदद करने की कोशिश करते हैं।  हर टीचर को ऐसा ही होना चाहिए। फ्रेंडशिप डे पर मैं सबसे पहले ऋषि राज सिंह को ही बधाई देती हूं।

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- फोटो : अमर उजाला
खून से गहरा हुआ दोस्ती का रंग : सेक्टर - 62 के एक कॉलेज में प्रबंधक के तौर पर काम करने वाले अख्तर मलिक और ऋषि की दोस्ती खून देने से शुरू हुई थी। आज इनकी दोस्ती पर इसका रंग इस कदर चढ़ चुका है कि पूरे ऑफिस में चर्चा है। अख्तर ने बताया कि 2005 में सेक्टर - 62 में खड़ा हुआ था। उसी दौरान मेरे घर से फोन आया और मुझे बताया कि मेरे रिश्तेदारी में एक एक्सीडेंट हो गया और उनको खून की जरूरत है। इसके लिए मैंने अपने कई दोस्तों को फोन किया, लेकिन सब ने कोई न कोई बहाना बनाकर खून देने से मना कर दिया। मैं बहुत परेशान हो गया था। 
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- फोटो : अमर उजाला

वहीं खड़े ऋषि ने मेरी सारी बातें सुनी ली थीं और उसने आगे बढ़कर खुद अस्पताल जाकर ब्लड देने के लिए कहा। एक अनजान शख्स के ऐसा बोलने से मुझेउम्मीद जगी। ऋषि ने अस्पताल जाकर खून दिया। तब से हम दोनों की दोस्ती गहरी हो गई है। 2010 में हम दोनों एक ही जगह नौकरी करने लगे। अख्तर ने बताया कि ईद पर ऋषि मेरे घर आता है और दीपावली में मैं उसके घर जाता हूं। हम दोनों खुद को एक ही परिवार के मानते हैं।

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