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गठिया को लेकर मन में जो भ्रम हैं, ये खबर पढ़कर दूर हो जाएंगे, अब लाइलाज नहीं रही बीमारी
Sat, 12 Oct 2019 01:58 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 12 Oct 2019 01:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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गठिया (अर्थराइटिस) पर कई सारे मिथ्य है। कोई कहता है कि यह ठीक नहीं हो सकता। ताउम्र दवाई चलेगी। अंग्रेजी दवाइयों के कई सारे साइड इफेक्ट हैं। गठिया सिर्फ जोड़ों में हो सकता है और कहीं नहीं। जब इतने सारे भ्रम हो तो इस बीमारी से पीड़ित मरीज को सटीक इलाज मिल पाना मुश्किल होता है। मरीज इधर-उधर भटकता रहेगा। काफी नुकसान होने के बाद ही वह पीजीआई जैसे संस्थान के पास पहुंच सकेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि इसमें जितना दोष मरीज का है, उतना ही दोष उस फिजीशियन या आरथोपीडिक्स का भी है, जो पेशेंट को रूमेटोलाजिस्ट (गठिया का इलाज करने वाले विशेषज्ञ) के पास रेफर करने के बजाय अपने पास रखकर उसका इलाज करता रहता है। ऐसे में इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। क्योंकि समय पर गठिया का इलाज नहीं कराने से धीरे-धीरे यह मर्ज गंभीर बनता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है। हर साल 12 अक्तूबर को वर्ल्ड आर्थराइटिस डे मनाया जाता है। जानते हैं इस बीमारी के कुछ तथ्यों को।
arthritis
क्या होता है अर्थराइटिस
अर्थराइटिस यानी जोड़ों की बीमारी। आम भाषा में इस बीमारी को गठिया कहा जाता है। यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। जब किसी व्यक्ति की इम्युनिटी अनियंत्रित होती है तो जोड़ों की झिल्ली के विरोध में काम करने लगती है। इससे जोड़ों को, जोड़ों के आसपास के टिश्यू को और उनको जोड़ने वाले दूसरे टिश्यू (ऊतकों) को भी प्रभावित करता है। इसी को अर्थराइटिस कहते हैं।
अर्थराइटिस यानी जोड़ों की बीमारी। आम भाषा में इस बीमारी को गठिया कहा जाता है। यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। जब किसी व्यक्ति की इम्युनिटी अनियंत्रित होती है तो जोड़ों की झिल्ली के विरोध में काम करने लगती है। इससे जोड़ों को, जोड़ों के आसपास के टिश्यू को और उनको जोड़ने वाले दूसरे टिश्यू (ऊतकों) को भी प्रभावित करता है। इसी को अर्थराइटिस कहते हैं।
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arthritis
कितने प्रकार का है अर्थराइटिस
अर्थराइटिस के 200 से ज्यादा प्रकार हैं। कई अर्थराइटिस कुछ बीमारी के बाद शरीर में दिखते हैं। जो अपने आप ठीक हो जाते हैं। कुछ अर्थराइटिस की दवा एक से डेढ़ साल तक चलती है और कुछ की लंबे समय तक, लेकिन अधिकतर अर्थराइटिस अब दवा से ठीक हो जाते हैं। बस सही वक्त पर डाक्टर के पास जाना चाहिए।
अर्थराइटिस के 200 से ज्यादा प्रकार हैं। कई अर्थराइटिस कुछ बीमारी के बाद शरीर में दिखते हैं। जो अपने आप ठीक हो जाते हैं। कुछ अर्थराइटिस की दवा एक से डेढ़ साल तक चलती है और कुछ की लंबे समय तक, लेकिन अधिकतर अर्थराइटिस अब दवा से ठीक हो जाते हैं। बस सही वक्त पर डाक्टर के पास जाना चाहिए।
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आर्थराइटिस की समस्या
इन बातों का ध्यान रखिए
स्मोकिंग करने से अर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है। जोड़ों में दर्द के साथ यदि सुबह उठते वक्त अकड़न आए तो यह अर्थराइटिस का प्रमुख लक्षण है। रोजाना कम से कम 40-45 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें। प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर खाना खाएं। दिन भर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। यह शरीर में नमी बनाए रखता है।
स्मोकिंग करने से अर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है। जोड़ों में दर्द के साथ यदि सुबह उठते वक्त अकड़न आए तो यह अर्थराइटिस का प्रमुख लक्षण है। रोजाना कम से कम 40-45 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें। प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर खाना खाएं। दिन भर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। यह शरीर में नमी बनाए रखता है।