पंजाब की 15वीं विधानसभा के लिए वोटरों ने 1145 प्रत्याशियों का भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया। 11 मार्च को चुनाव नतीजों की घोषणा तक पंजाबवासियों का हर दिन इस चर्चा के साथ गुजर रहा है कि सूबे में अगली सरकार किसकी बनेगी?
पंजाब में किसके सर होगा ताज, जानिए किसकी बन रही सरकार
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चर्चा का विषय यह भी है कि पहली बार त्रिकोणीय चुनाव मुकाबले के बीच अगर किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो सूबे में सरकार बनाने के लिए कौन-कौन से दलों के बीच गठजोड़ होना संभव है? अलग-अलग हलकों से प्राप्त हुए वोटरों के रुझान से यही निष्कर्ष निकला कि अधिकांश विधानसभा सीटों पर मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच रहा। शिअद-भाजपा गठबंधन के इस दौड़ में तीसरे स्थान पर पिछड़ने की आशंका जताई गई है।
प्रदेश का मालवा क्षेत्र जहां सबसे अधिक 69 विधानसभा हलके हैं और इसी क्षेत्र में सर्वाधिक सीटें जीतने वाली पार्टी की ही हमेशा सरकार भी बनती रही है, में कांग्रेस और आप के बीच बराबर की टक्कर दिखाई दी। माना जा रहा था कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा इन चुनावों में शिअद-भाजपा गठबंधन को समर्थन दिए जाने से मालवा क्षेत्र में 35 लाख से अधिक डेरा प्रेमियों के वोट गठबंधन की झोली में चले जाएंगे, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसा प्रभाव भी दिखाई नहीं दिया, उलटे शिअद को इस समर्थन के चलते अपने पारंपरिक पंथक वोटरों की नाराजगी झेलनी पड़ी है, जो मतदाताओं से बातचीत में उभर कर सामने आई।
ग्राउंड रिपोर्ट में ही यह बात भी सामने आई कि गुर्जर और दलित वोटरों का ज्यादा झुकाव आप की तरफ देखा गया। शिअद के नाराज पंथक वोटर भी कांग्रेस और आप की ओर जाते दिखाई दिए हैं। इस तरह, माना जा रहा है कि 19-20 के अंतर से जीत का सेहरा कांग्रेस या आप के सिर बंध सकता है, लेकिन यह केवल अनुमान है क्योंकि अगर डेरा प्रेमियों के सभी वोट गठबंधन की झोली में गए तो चुनाव के नतीजे बिल्कुल अलग होंगे और तीनों ही दाबेदारों में कोई भी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकेगा।
एक नजर वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव नतीजों पर डालें तो, प्रदेश में शिअद-भाजपा गठबंधन ने अप्रत्याशित जीत हासिल कर सत्ता में कब्जा जमाए रखा था। यह जीत इतनी अप्रत्याशित थी कि उस समय के सभी सर्वे रिपोर्ट में कांग्रेस को अगली सरकार बनाते हुए दिखाया गया था। और तो और, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी नतीजों का अनुमान लगाकर, नतीजे आने से पहले ही परिवार सहित विदेश घूमने निकल गए थे।