व्हीलचेयर पर बैठे इस शख्स को देखिए। इनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शराब और हाइवे किनारे बने शराब के ठेके बैन किए। जानिए कैसे किया ये काम।
ये शख्स चंडीगढ़ का रहने वाला है और नाम है हरमन सिद्धू। 47 साल के इस विकलांग शख्स की याचिका पर शहर के जिस शख्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे और उसके 500 मीटर के दायरे में स्थित होटलों में शराबबंदी का आदेश दिया, लेकिन अबउन्हें पिछले दो दिनों से शराब माफिया की तरफ से धमकी भरी कॉल्स आने लगी हैं। दिन भर में करीब 20-25 कॉल आ जाती हैं।
इस पर सिद्धू का कहना है कि वे इनसे डरने वाले नहीं है। उनके लिए यह कोई नई बात नहीं। वे इससे पहले राजस्थान में भी नशे के खिलाफ लड़ चुके हैं। सिद्धू का कहना है कि कॉल करने वाले इशारों-इशारों में धमकाते हैं। कभी महाराष्ट्र से कोई बात करता है तो कभी बंगाल से। हरियाणा-पंजाब और राजस्थान से आने वाली कॉल्स की तो कोई गिनती नहीं। 1 अप्रैल को उन्हें 22 कॉल्स आईं जबकि 2 अप्रैल को 26।
सिद्धू का कहना है कि उन्हें धमकियों का कोई खौफ नहीं। हालांकि वे दिन भर फोन सुनते-सुनते परेशान जरूर हो जाते हैं। इस कारण वे अब अनजान नंबरों को ब्लॉक कर रहे हैं। वे अब तक 250 से ज्यादा फोन नंबर ब्लॉक कर चुके हैं। वहीं हरमन सिद्धू ने बताया कि इस पूरे मामले में चंडीगढ़ प्रशासन का रवैया पूरी तरह से लापरवाही वाला रहा है।
15 दिसंबर 2016 को हाईवे पर शराबबंदी का फैसला आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरे देश से करीब 68 लोग पहुंचे। उनकी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने ध्यान दिया और 31 मार्च 2017 को संशोधित फैसला सुनाया। इससे कुछ लोगों को राहत मिली। लेकिन न तो चंडीगढ़ प्रशासन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और न ही चंडीगढ़ के होटल मालिक।