{"_id":"5c40056abdec22737a366b0c","slug":"verdict-on-ram-rahim-in-chhatrapati-murder-case-by-cbi-court","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"क्या है पत्रकार छत्रपति मर्डर केस, जिसमें राम रहीम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा...5 अहम बातें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्या है पत्रकार छत्रपति मर्डर केस, जिसमें राम रहीम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा...5 अहम बातें
Fri, 18 Jan 2019 09:02 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 18 Jan 2019 09:02 AM IST
विज्ञापन
छत्रपति मर्डर केस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जानिए क्या है पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस और वो चिट्ठी जिसे पत्रकार ने छापा था और जिस वजह से राम रहीम ने अपने तीन साथियों से उसकी हत्या करवा दी थी।
छत्रपति मर्डर केस
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में परिवार को न्याय के लिए 16 साल इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कोर्ट में करीब 150 बार पेशी हुई। सीबीआई ने 46 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने 21 लोगों की गवाही करवाई। 11 जनवारी को चारों को आईपीसी की धारा 302 और IPC की धारा 120बी के तहत दोषी करार दिया गया है, जबकि आरोपी कृष्ण लाल को 1959 आर्म्स एक्ट के सेक्शन 29 के तहत भी दोषी करार दिया गया है। आरोपी निर्मल सिंह को 1959 आर्म्स एक्ट के सेक्शन 25 के तहत भी दोषी करार दिया गया है। हत्या के चश्मदीद गवाह रामचंद्र के बेटे अंशुल और अदिरमन थे, जिन्होंने कोर्ट में आंखों देखी बयां की थी। इसके अलावा हत्या के षड्यंत्र के बारे में गवाह खट्टा सिंह ने कोर्ट में बयान दिए थे। साथ ही डॉक्टरों की भी गवाही हुई थी।
राम रहीम
बात साल 2002 की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के नाम एक गुमनाम चिट्ठी आई, जो तीन पेज की थी। ये चिट्ठी एक महिला की ओर से भेजी गई थी। इसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की शिकायत की गई। डेरा प्रमुख पर यौन शोषण व दुष्कर्म का आरोप लगाया गया। चिट्ठी में दो अन्य साध्वियों का भी जिक्र था, जिनके साथ प्रताड़ना होने की बात कही गई थी। चिट्ठी में गुहार लगाते हुए सहायता मांगी गई और कहा गया कि मैं अपना नाम पता लिखूंगी तो मुझे मार दिया जाएगा। किसी एजेंसी से मामले की जांच करवाई जाए और पता लगाया जाए कि कहां क्या चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राम रहीम
पीएमओ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सितम्बर 2002 में सीबीआई को इस मामले में जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जांच में आरोपों में सच्चाई पाई और डेरामुखी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। मामले में सीबीआई ने विशेष अदालत में 31 जुलाई, 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया। जिसमें डेरामुखी को जमानत मिल गई, लेकिन मामला चलता रहा। राम रहीम पर केस 2002 में दर्ज हुआ था। साल 2007 में आरोप पत्र दाखिला हुआ। पहली सुनवाई जनवरी 2012 में हुई। सीबीआई की अदालत में पहली सुनवाई अक्तूबर 2013 में हुई। केस में बाबा राम रहीम का ड्राइवर मुख्य गवाह रहा और 200 से ज्यादा सुनवाइयां हुईं।
विज्ञापन
राम रहीम
- फोटो : SELF
25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को दोषी करार दिया। बाबा को सजा का फैसला 28 अगस्त को हुआ। उसे दो मामलों में बीस साल की सजा सुनाई गई, जिसे भुगतने के लिए इन दिनों वह सुनारिया जेल रोहतक में है। यही चिट्ठी पत्रकार छत्रपति के मर्डर का कारण बनी। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र ‘पूरा सच’में इस संबंध में अनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद राम रहीम के लोग पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को आए दिन धमकियां देते थे। इसके बावजूद पत्रकार निर्भीक होकर राम रहीम के खिलाफ लिखते रहे।