अशोक सिंघल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, देखिए
विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंहल के निधन से हरियाणा में संगठन से जुड़े लोग गहरे सदमे में हैं। सिंहल का राज्य से गहरा नाता था। वह हरियाणा दिल्ली प्रांत प्रमुख रहने के दौरान तो यहां कई बार आए ही, आपात काल के दौरान पुलिस से बचने के लिए भी उन्होंने सोनीपत और कैथल की राह पकड़ी थी। अशोक सिंघल वर्ष 2005 में सरस्वती नदी शोध संस्थान की ओर से यमुनानगर के आदिबद्री में सरस्वती उद्गम स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करने भी आए।
अशोक सिंघल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, देखिए
उन्होंने यहां सरकारी रेस्टहाउस की विजिटर बुक में अपना संदेश लिखा ‘सरस्वती नदी के उद्गम तथा उसके प्रवाह का वैज्ञानिक तकनीकों से पता करने से हमारी संस्कृति और समाज की प्राचीनता सिद्ध होती है। इससे आर्य बाहर से आए, इस सिद्धांत का थोथलापन पता चलता है। अब भी कोई यह पढ़ाता है कि आर्य भारत में बाहर से आए तो वह झूठा इतिहास पढ़ा रहा है।’ विहिप के कैथल जिला अध्यक्ष प्रेमचंद मित्तल के अनुसार आपातकाल के समय सिंहल कैथल में रहे थे।
अशोक सिंघल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, देखिए
वर्ष 1983 में गंगा यात्रा के दौरान भी यहां आए। सोनीपत के भाजपा नेता ललित बत्रा ने बताया कि 1977 में देश में आपातकाल लागू होने के बाद पुलिस ने धरपकड़ अभियान तेज कर दिया। बत्रा परिवार भी आरएसएस से जुड़ा हुआ था। ऐसे में अशोक सिंहल सोनीपत पहुंचे और कई दिन तक उनके घर पर रहे। 24 दिसंबर 1993 को श्रीराम नागरिक अभिनंदन समिति व हिंदू एकता मंच की ओर से शंभू दयाल स्कूल के मैदान में अशोक सिंहल का अभिनंदन किया गया।
अशोक सिंघल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, देखिए
हरियाणा के प्रांत संघ चालक रहे यमुनानगर के दर्शन लाल जैन बताते हैं कि वर्ष 1958 में सिंहल सहारनपुर जिले के प्रचारक थे। उस समय आरएसएस के सर संघ चालक एमएस गोलवलकर के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सिंहल साथियों संग साइकिल से जगाधारी आए थे। रेवाड़ी में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश ग्रोवर ने बताया कि सिंहल 1976 में रेवाड़ी आए थे। यहां रात को रुके थे और प्रात:कालीन शाखा में शामिल हुए थे।
अशोक सिंघल के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, देखिए
वहीं रोहतक के हुडा कॉम्प्लेक्स में आरएसएस के हरियाणा प्रांत कार्यालय को भले ही नया बना दिया गया हो, लेकिन वहां से आज भी विहिप नेता अशोक सिंहल की बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1980-83 के बीच का वह समय था, जब अशोक सिंहल प्रांत कार्यालय में इस समय के कमरा नंबर दस में ठहरते थे और संघ की नीतियों को फैलाने की योजनाएं बनती थीं।