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जिम जाते समय खली को झुकना पड़ा, अंदर का हाल देखकर हुए हैरान
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Mon, 13 Jun 2016 12:23 PM IST
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हिसार दौरे पर आए द ग्रेट खली लोगों और पत्रकारों से रूबरू होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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द ग्रेट खली काफी लंबे कद के रेसलर हैं। हरियाणा के हिसार में पहुंचे खली को जिम के अंदर जाने के लिए झुकना पड़ा। अंदर गए तो हैरान रह गए। देखिए, तस्वीरें।
हिसार दौरे पर आए द ग्रेट खली लोगों और पत्रकारों से रूबरू होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
खली से मिलने से काफी संख्या में प्रशंसक पहुंचे हुए थे। खली ने भी किसी को निराश नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे हरियाणा में जल्द ही एक प्रोफेशनल रेसलिंग अकेडमी खोलेंगे, ताकि हरियाणा के ऊर्जावान नौजवान भी उनकी तरह विदेशों में जाकर अपनी ताकत का डंका बजा सकें। खली ने माना कि हरियाणा के खिलाड़ी अन्य खिलाड़ियों से ज्यादा जुनूनी और जोशीले हैं, जो बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
हिसार दौरे पर आए द ग्रेट खली लोगों और पत्रकारों से रूबरू होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
खली ने बताया कि उनकी पंजाब के जालंधर स्थित अकेडमी में सबसे ज्यादा रेसलर हरियाणा के हैं। यहां की लड़कियां भी उनकी अकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। वैसे भी स्पोर्ट्स के मामले में हरियाणा अन्य राज्यों की अपेक्षा बहुत आगे है। यहां के खिलाड़ियों के लिए एक अकेडमी खोलने पर विचार किया जा रहा है। ताकि युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल किया जा सके। इस मौके पर महिला रेसलर बॉबी और कविता के अलावा हरियाणा के कई अन्य रेसलर मौजूद थे।
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हिसार दौरे पर आए द ग्रेट खली लोगों और पत्रकारों से रूबरू होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
देश से हजारों खली निकालना है मकसद: खली ने कहा कि मैंने अपना सब कुछ अकेडमी में लगा दिया है। यह मेरे लिए बिजनेस नहीं है। मैं लड़कों को आगे लाने का प्रयास कर रहा हूं। मेरी अकेडमी में कई राज्यों के करीब 200 लड़के ट्रेनिंग कर रहे हैं, जिनमें से आठ लड़कियां हैं। मेरा मकसद है कि देश से हजारों ग्रेट खली निकलें। मैं अपने इसी मकसद के लिए यहां अकेडमी खोलने पर विचार कर रहा हूं।
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हिसार दौरे पर आए द ग्रेट खली लोगों और पत्रकारों से रूबरू होते हुए
- फोटो : अमर उजाला
नशा खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार खेल: पंजाब में नशे को लेकर उन्होंने कहा कि खेलों को नशा खत्म करने के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जब बच्चे को किसी भी स्पोर्ट्स में डाल दिया जाएगा तो नशा करने की बात तो उनके मन में ही नहीं आएगी। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को खेलों के प्रति अवश्य प्रेरित करना चाहिए। जितने अधिक खेल अकादमी होंगी और युवा खेलेंगे तो नशामुक्ति केंद्रों की भी जरूरत नहीं रहेगी।