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आईवीएफ से मां-बाप बनना चाहते हैं, तो ये जानकारी पढ़ने के बाद ही फैसला लें, फायदे में रहेंगे
Fri, 07 Jun 2019 12:44 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 07 Jun 2019 12:44 PM IST
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आईवीएफ
- फोटो : सोशल मीडिया
अगर आप आईवीएफ तकनीक के जरिए मां-बाप बनने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये जानकारी पढ़ने के बाद ही फैसला लें, बड़े फायदे में रहेंगे और सफलता भी मिलेगी।
बेबी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
दरअसल, अब महिलाओं को पहले ही मालूम चल जाएगा कि वे टेस्ट ट्यूब बेबी लायक है या नहीं। उन्हें यह भी मालूम चल जाएगा कि उनके लिए आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टीलाइजेशन तकनीक कितनी कारगर साबित हो सकती है, यानी आईवीएफ उनमें सफल हो सकता है या नहीं। इसके बाद ही महिलाएं इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी। सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के वैज्ञानिक इस तकनीक पर पिछले काफी समय से काम कर रहे हैं।
बेबी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
इन वैज्ञानिकों की टीम में हरियाणा मूल के सीनियर साइंसटिस्ट डॉ. राजेंद्र सिंह भी शामिल है। पिछले दिनों हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण द्वारा डॉ. राजेंद्र सिंह को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया गया था। वैज्ञानिकों का दावा है कि रिसर्च लगभग फाइनल स्टेज पर है और मार्च 2020 तक सीएसआईआर से लाइसेंसशुदा यह ‘इनफरटिलिटी डाइगनोस्टिक किट’ मार्केट में होगी और किसी भी लैब में इसका परीक्षण किया जा सकेगा।
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बेबी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
आईवीएफ तकनीक तीन चरणों में पूरी होती है, जिसमें 5 लाख रुपये तक का खर्च आ जाता है। मगर कई मामलों में अंत में मालूम चलता है कि मां बनने की इच्छुक संबंधित महिला में यह तकनीक असफल हो गई है। ऐसी स्थिति में दंपति का लाखों रुपये का नुकसान हो जाता है। लेकिन अब पहले ही संबंधित महिला में इस तकनीक की सफलता और असफलता की संभावना का मालूम चल जाएगा।
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बेबी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
डाक के जरिये भी मिल सकेगी टेस्ट की सुविधा
इस तकनीक के तहत पुरुष के स्पम सैंपल, दो एमएल ब्लड सैंपल समेत कुछ अन्य ह्यूमन मार्क्स चिह्नित किए जाएंगे। इसके लिए भी ‘मार्क्स डिसकवर किट’ का सहारा लिया जाएगा। ह्यूमन मार्क्स को लेकर विभिन्न इलाकों के व्यक्तियों के रहन-सहन व खान-पान पर पहले ही स्टडी की जा चुकी है। उसके बाद ‘इनफरटिलिटी डाइगनोस्टिक किट’ के जरिए यह टेस्ट होगा। संबंधित लोगों को इस टेस्ट के लिए डाक सुविधा भी मिलेगी यानी सैंपल डाक के जरिए सीएसआईआर लखनऊ पोस्ट किए जाएंगे, रिसर्च के बाद रिजल्ट संबंधित दंपति को भेज दिया जाएगा।
इस तकनीक के तहत पुरुष के स्पम सैंपल, दो एमएल ब्लड सैंपल समेत कुछ अन्य ह्यूमन मार्क्स चिह्नित किए जाएंगे। इसके लिए भी ‘मार्क्स डिसकवर किट’ का सहारा लिया जाएगा। ह्यूमन मार्क्स को लेकर विभिन्न इलाकों के व्यक्तियों के रहन-सहन व खान-पान पर पहले ही स्टडी की जा चुकी है। उसके बाद ‘इनफरटिलिटी डाइगनोस्टिक किट’ के जरिए यह टेस्ट होगा। संबंधित लोगों को इस टेस्ट के लिए डाक सुविधा भी मिलेगी यानी सैंपल डाक के जरिए सीएसआईआर लखनऊ पोस्ट किए जाएंगे, रिसर्च के बाद रिजल्ट संबंधित दंपति को भेज दिया जाएगा।