फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Pics: सियाचिन में शहीद कर्नल को दी गई अंतिम विदाई, पिता बेसुध बेटियां पथराईं

Fri, 19 May 2017 09:28 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 19 May 2017 09:28 AM IST
विज्ञापन
siachin martyr colonel mannu tandon funeral at karnal
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
दुनिया के सबसे ऊंचे लड़ाई के मैदान सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी गई तो कोहराम मच गया, देखिए तस्वीरें।
siachin martyr colonel mannu tandon funeral at karnal
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
करनाल के सेक्टर-9 निवासी कर्नल मनु टंडन का अंतिम संस्कार मॉडल टाउन श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। मनु टंडन देश की सेवा करते हुए लद्दाख सियाचिन में शहीद हो गए हैं। मन्नू 47 वर्षीय कर्नल टंडन आर्मी डॉक्टर थे और उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। बुधवार को जब उनका शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।
siachin martyr colonel mannu tandon funeral at karnal
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
हालांकि मनु की मौत के सही कारण पता नहीं चल पाए हैं, लेकिन उनके पिता पिता डॉ. कृष्ण लाल ने बताया कि मुझे सुबह लद्दाख से फोन आया कि यूनिट में सो रहे मनु टंडन को उठाया गया तो वे उठे नहीं। फिर जांच के बाद पता चला कि वे शहीद हो गए हैं। पिता का कहना है कि एक दिन पहले मेरी मन्नू से बात हुई थी, उसने कहा थी कि 15 जून को वे छुट्टी पर आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
siachin martyr colonel mannu tandon funeral at karnal
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
कर्नल के पिता ने बताया कि बेटे के घर आने की सूचना से पूरा परिवार खुश था, लेकिन अगले ही दिन ये खुशियां मातम में बदल गईं। मनु ने एमबीबीएस, एमडी करने के बाद भी देश सेवा के लिए आर्मी को ज्वाइन किया। पिछले बीस साल से वे आर्मी में थे। 6 माह से लद्दाख क्षेत्र में कार्यरत थे। अपने पीछे पत्नी डॉ. गीतांजलि, बेटी ऐशना और बरखा को छोड़कर गए हैं।
विज्ञापन
siachin martyr colonel mannu tandon funeral at karnal
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
एनडीआरआई करनाल से रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. हरिकृष्ण लाल ने बताया कि उनका बेटा हमेशा देश सेवा के लिए आगे रहा है। मनु टंडन देश सेवा में ही विश्वास रखते थे और खुले विचारों के थे। वे अक्सर अपनी दोनों बेटियों को कहते थे कि वे अपने जीवन में कुछ भी बने व कोई भी काम करें, लेकिन उसमें देश सेवा होनी चाहिए। क्योंकि देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है और जो सुकून देश सेवा करके मिलता है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed