कारगिल विजय दिवस के मौके पर मिलिए एक ऐसे योद्धा से, जिन्हें मृत घोषित कर दिया गया था लेकिन वे जी उठे। जानिए आखिर कैसे हुआ वीर सपूत का पुनर्जन्म।
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कारगिल के योद्धा मेजर डीपी सिंह
मरकर जी उठने वाले वीर बहादुर का नाम है मेजर डीपी सिंह। इन्हें फर्स्ट इंडियन ब्लेड मैराथन रनर के नाम से भी पहचाना जाता है। इन्होंने पहले मौत को मात दी और आज वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं, लेकिन उनके पुनर्जन्म की कहानी दिलचस्प है।
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कारगिल के योद्धा मेजर डीपी सिंह
डीपी सिंह हर साल 15 जुलाई को अपना पुनर्जन्म दिवस मनाते हैं। अभी वे 44 साल के हो चुके हैं, लेकिन जिंदगी के 17 साल कुछ दिन पहले ही पूरे किए हैं। कारगिल के युद्ध में डीपी सिंह बुरी तरह से घायल हो गए थे। उनका एक पैर भी कट चुका था। इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन वह जी उठे।
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कारगिल के योद्धा मेजर डीपी सिंह
खुद डीपी सिंह बताते हैं कि 999 की बात है ये। करगिल युद्ध चल रहा था। एक ब्लास्ट हुआ। आठ किलोमीटर तक मेरे साथी मारे गए, उनके शव मेरी आंखों के सामने थे। मैं डेढ़ किलोमीटर ही दूर था। खून में सना हुआ था मैं। एक पैर तो वहीं गंवा चुका था। शरीर पर 40 गहरे घाव थे।
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कारगिल के योद्धा मेजर डीपी सिंह
मेरे साथी अपनी जान दांव पर लगाकर मुझे वहां से ले गए। बीच में पाक ऑक्यूपाइड नदी आई। एक साथी को ठीक से तैरना भी नहीं आता था। फिर भी मुझे अस्पताल पहुंचाया उन्होंने। किसी भी क्षण उन्हें गोली लग सकती थी, लेकिन उन्होंने मुझे यूं नहीं छोड़ा। डॉक्टर ने तो मुझे डेड डिक्लेयर कर दिया था।