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देख नहीं सकते, पर आंख वालों से अच्छे हैं ये दो मुस्लिम भाई, रोज करते हैं अनोखा काम
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Tue, 21 Feb 2017 09:30 PM IST
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दो मुस्लिम भाई, देख नहीं सकते पर करते हैं अनोखा काम
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देख नहीं सकते, पर आंख वालों से कहीं ज्यादा अच्छे हैं ये दो मुस्लिम भाई। ये वो काम करते हैं, जो खुद को हिन्दू कहने वाला कभी नहीं कर पाता। दिचलस्प कहानी।
दो मुस्लिम भाई, देख नहीं सकते पर करते हैं अनोखा काम
पंजाब के अमृतसर स्थित उत्तर भारत के इकलौते और सबसे पुराने ब्लाइंड स्कूल 'अंध विद्यालय' में पढ़ते हैं मुजफ्फर मोहम्मद और सुल्तान मोहम्मद। ये आंखों से देख नहीं सकते, लेकिन हर रोज हिन्दू मुस्लिम का भेद खत्म करते हुए आपसी सद्भाव तथा धर्मनिर्पेक्षता पाठ बच्चों को पढ़ाते हैं। ये दोनों भाई हर रोज पहले स्कूल में हवन करते हैं और उसके बाद नमाज भी पढ़ते हैं।
दो मुस्लिम भाई, देख नहीं सकते पर करते हैं अनोखा काम
मुजफ्फर मोहम्मद की उम्र 20 साल है और वह 8वीं क्लास का स्टूडेंट है। सुल्तान मोहम्मद 17 साल का है और छठी क्लास में पढ़ता है। यह दोनों हिमाचल प्रदेश के चंबा स्थित गांव मोड़ा के रहने वाले हैं। इस गांव तक पहुंचने में दो दिन लगते हैं। इनके पिता का नाम जान मोहम्मद और मां का नाम फातिमा बेगम हैं। पिता मेहनत मजदूरी करते हैं।
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दो मुस्लिम भाई, देख नहीं सकते पर करते हैं अनोखा काम
बातचीत करने पर पता चला कि इनके अलावा इनके तीन और भाई बहन हैं। दो बहनों की आंखें तो ठीक हैं, लेकिन सबसे छोटा भाई भी नेत्रहीन है। इनकी आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी। पांचवीं तक की पढ़ाई गांव में की और उसके बाद वे दोनों इस स्कूल में आ गए। वे पिछले सात साल से यहां पर हैं और ब्रेल लिपि के जरिए आगे की पढ़ाई कर रहे हैं।
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दोनों भाइयों से जब बात की गई तो मुजफ्फर ने बताया कि अब्बू ने हमें यह सब सिखाया। वह हमेशा सिखाते रहे कि सभी धर्मों का सम्मान करो। हम एक ही ईश्वर के बच्चे हैं। धर्म मजहब तो लोगों बना दिए हैं और उसी के मुताबिक भगवान को पूजने और मानने के अलग-अलग तरीके हैं। भगवान तो सभी का एक ही है और सभी उसकी संतान हैं। वह किसी से भेदभाव नहीं करता तो ऐसा करने वाला इंसान कौन है।