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एक फैमिली: पाक के दिल में भारत, भारत के दिल में पाक

Tue, 21 Apr 2015 09:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा) Updated Tue, 21 Apr 2015 09:08 AM IST
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एक फैमिली: पाक के दिल में भारत, भारत के दिल में पाक

revealed: america from pakistan easier to go difficult come to India

पाकिस्तान से जितना आसान अमेरिका जाना है, उतना ही मुश्किल भरा भारत आना है। भारत का वीजा लेने के लिए फीस तो मात्र 30 रुपये है। लेकिन वीजा प्राप्त करने के लिए वहां के लोगों को दस से 12 हजार रुपये कागजात पर खर्च करने पड़ते हैं। इसे जैसे कई खुलासे यमुनानगर आई एक  ने किए। तस्वीरों में देखिए, सभी खुलासे।

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पाकिस्तान के मंडी बहाऊदीन में रहने वाले ख्वाजा मोहम्मद ने बताया कि विभाजन से पहले उनके दादा दोस्त मोहम्मद और रघुबर दयाल गुप्ता निवासी अंबाला में रहते थे। दोनों गहरे दोस्त व पड़ोसी थे। दोस्त मोहम्मद की मौत के बाद उनके पोते ख्वाजा मोहम्मद आज भी अंबाला में रघुबर दयाल गुप्ता के परिवार के साथ अपना रिश्ता निभा रहे है।

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ख्वाजा मोहम्मद ने बताया कि पाकिस्तान के लोगों को अमेरिका, इंग्लैड, फ्रांस, कनैडा आदि देशों का वीजा बहुत आसानी से मिल जाता है, लेकिन भारत छोड़कर पाकिस्तान गए लोगों को भारत की यात्रा करने के लिए वीजा प्राप्त करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।  वीजा लेने के लिए भारी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद भारतीय दूतावास वीजा देने के लिए 45 दिन का समय लगाता है।

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भारत में अपना सब कुछ छोड़कर पाकिस्तान गए लोगों को अपने व्यवसाय स्थापित करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। जबकि पाकिस्तान में अपना सब कुछ छोड़कर भारत आए लोगों की संपत्ति पर पाकिस्तान के मूल निवासियों ने जबरन कब्जा कर लिया था। इस प्रकार भारत से पाकिस्तान गए लोगों को अपने अधिकार लेने के लिए लंबा कड़ा संघर्ष करना पड़ा है।

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ख्वाजा मोहम्मद ने बताया कि विभाजन के बाद पाकिस्तान के मूल निवासी भारत से पाकिस्तान आए लाखों लोगों को मुहाजिर कहकर पुकारते हैं। मुहाजिरों को मान-सम्मान नहीं मिलता। पिछले 30 वर्षों से पाकिस्तान में जारी आतंकवाद के कारण देश ने भारी कीमत चुकाई है। पाकिस्तान में इस समय करीब 35 लाख अफगानिस्तान के पठान हैं। जो आतंकवाद के लिए जिम्मेदार है।

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