राफेल के इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने के बाद यह लड़ाकू विमान न केवल वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाएगा। बल्कि यह विमान आर्मी और नेवी की भी ताकत बनेगा। युद्धक विमानों में 4.5 जनरेशन के इस राफेल विमान की संहारक क्षमता इतनी खतरनाक है कि ये लड़ाकू विमान इंडियन आर्मी और इंडियन नेवी के लिए भी बड़ा गेमचेंजर साबित होंगे।
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राफेल
- फोटो : dassault-aviation.com
दरअसल, राफेल विमानों का हाई एंगल अटैक इन विमानों की एक और बड़ी ताकत है। इस विमान को क्लोज कपल्ड कैन्डर्स व डेल्टा विंग कॉन्फ़िगरेशन के साथ तैयार किया गया जिस वजह से इस विमान का अत्यधिक ऊंचाई से अपने टारगेट पर सटीक अटैक करना आसान है। सन 1965 व सन 1971 का युद्ध हो या फिर 1999 में कारगिल वार इंडियन आर्मी के सभी सैन्य ऑपरेशंस में भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों ने अहम भूमिका निभाई थी।
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राफेल में लगे हथियार
- फोटो : dassault-aviation.com
फौज की ओर से युद्ध का आगाज करना हो या युद्ध का समापन एयरफोर्स के विमान इसमें सेना के लिए बड़े मददगार साबित होते हैं। इसी कड़ी में अब चीन और पाकिस्तान के साथ जिस तरह से तनातनी का माहौल बना हुआ है। उसे देखते हुए राफेल भी इंडियन आर्मी के लिए एक बड़ी ताकत के रूप में सामने आया है।
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राफेल लड़ाकू विमान
- फोटो : dassault aviation
इसी तरह आर्मी के सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशंस में भी टारगेट लोकेट होने के बाद यह विमान सेना को अपेक्षित सहयोग दे सकता है। दूसरी ओर इंडियन नेवी के लिए भी राफेल वरदान साबित होगा। ऊंचाई से तबाही की क्षमता रखने वाले यह लड़ाकू विमान एंटी शिप मिसाइल एएम-39 एग्जॉस्ट को भी लोड करने की क्षमता रखता है।
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राफेल विमान
- फोटो : फाइल फोटो
इसके साथ-साथ 500 से 2000 एलबीएस वजनी नॉन गाइडेड और लेजर गाइडेड बम भी साथ लेकर उड़ने की क्षमता इस राफेल में है। यानी इंडियन नेवी यदि कोई युद्ध ऑपरेशन चलाती है तो दुश्मन के पोत को ऊंचाई से ही यह लड़ाकू विमान एंटी शिप मिसाइल के जरिए नेस्तनाबूद कर सकता है। राफेल की एक और खास बात यह है कि ऑपरेशंस में 30 हजार फ्लाइट घंटों की क्षमता रखता है। अफगानिस्तान, लिबिया, माली, इराक और सीरिया में सैन्य ऑपरेशंस में इस विमान ने अहम भूमिका निभाई थी।