पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 40 वीर सपूतों ने शहादत दी थी। इनमें से चार जवान पंजाब के थे। शहीदों में पंजाब के रोपड़ जिले के कुलविंदर सिंह का नाम भी शामिल है। कुलविंदर सिंह अपने माता-पिता के इकलौते संतान थे। कुलविंदर सिंह नूरपुरबेदी के गांव रौली के रहने वाले थे।
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शहीद कुलविंदर सिंह के माता-पिता।
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कुलविंदर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और 10 दिन की छुट्टी के बाद 11 फरवरी को ही ड्यूटी पर लौटे थे। तीन दिन बाद 14 फरवरी को घर बेटे की शहादत की खबर पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया था। बेटे के शहादत के दो साल बाद आज भी रोजाना माता-पिता तस्वीर के सामने प्रणाम करते हैं।
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शहीद कुलविंदर सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
कुलविंदर के पिता ड्राइवरी करते थे। मां बीमार रहती हैं। कुलविंदर अपने मां-बाप का सहारा बनने के लिए सेना में 2014 में भर्ती हुए थे लेकिन भगवान ने उनसे उनके बुढ़ापे का सहारा एक झटके में छीन लिया। अब दोनों बेबस लाचार हैं लेकिन बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है।
अच्छे खिलाड़ी थे कुलविंदर
छह फुट के कुलविंदर सिंह क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी थे। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नूरपुरबेदी से 12वीं करने के बाद कुलविंदर सिंह ने नंगल में आईटीआई की। 21 साल की उम्र में वे सीआरपीएफ की 92वीं बटालियन में भर्ती हो गए थे।
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शहीद के पिता के पास बैठे लोग।
- फोटो : अमर उजाला
24 दिसंबर 1992 को जन्मे कुलविंदर सिंह की मंगनी हो चुकी थी। आठ नवंबर को शादी होनी थी। माता-पिता अपने इकलौते बेटे के विवाह की तैयारियों में जुटे थे लेकिन बेटे के शहीद होने की सूचना से घर में कोहराम मच गया था।