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शहीद होने वाला पहला गरुड़ कमांडो, 5 गोलियों से गिरा
Wed, 06 Jan 2016 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Updated Wed, 06 Jan 2016 09:27 AM IST
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पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले में पहली बार गरूड़ फोर्स का कमांडो शहीद हुआ। 5 गोलियां लगने पर नीचे गिरा था कमांडो। देखिए, उसके बारे में। -रिपोर्ट/मोहित धूपड़, अंबाला।
शहीद होने वाला पहला गरुड़ कमांडो, 5 गोलियों से गिरा
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एयरफोर्स की कमांडों विंग गरूड़ फोर्स का गुरसेवक पहला ऐसा कमांडो था, जिसने शहादत पाई है। अमूमन सेना के पैरा कमांडो, नेवी के मरीन कमांडो व एनएसजी के कमांडो ही आतंकियों से भिड़ते हैं, लेकिन बरसों बाद ऐसा हुआ है कि आतंकियों ने एयरबेस को निशाना बनाया है, इसलिए उनसे लड़ने के गरूड़ कमाडों स्पेशल ऑपरेशन पर तैनात किए गए।
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सबसे पहले जालंधर के आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन से तेज तर्रार गरूड़ कमांडों फोर्स को पठानकोट एयरबेस में घुसे आतंकियों को खदेड़ने के लिए भेजा गया। इसी फोर्स में शामिल था अंबाला का पूत शहीद गुरसेवक। शनिवार अलसुबह अंधेरे में ही कमांडिंग अफसर ने गरूड़ कमांडो फोर्स को टुकड़ियों में बांटकर एयरबेस के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया।
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गुरसेवक के साथ दो और कमांडों थे। तीनों कमांडो की टुकड़ी हथियारों से लैस एयरबैस के उन हिस्सों में आगे बढ़ रही थी, जहां झाड़ियां और पेड़ लगे हुए थे। टीम को गुरसेवक ही लीड कर रहा था। गुरसेवक अपने साथियों के साथ आगे बढ़ता गया, लेकिन अचानक एयरबेस के एक हिस्से में कुछ हरकत दिखाई थी। गुरसेवक ने तुरंत अपने अफसर को इस हरकत से अवगत करवाया।
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इसके बाद वह अपनी टीम के साथ उसी हरकत की दिशा में आगे बढ़ने लगा। दरअसल वो हरकत झाड़ियों की आड़ में छिपे आतंकवादियों की थी। आतंकी भांप चुके थे कि ये कमांडो उनकी तलाश में लगातार उनकी दिशा में ही आगे बढ़ेंगे, इसलिए उन्होंने तुरंत फायरिंग करने की बजाए गुरसेवक और उसके साथियों को और नजदीक आने का मौका दिया।
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