पहले ट्यूमर से जीतीं, फिर ओलंपिक में इतिहास रचकर देश का नाम रोशन किया। अब इन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा।
ओलंपिक व पैरालंपिक में देश को मेडल दिलाकर इतिहास रचने वाली बेटियों दीपा मलिक व साक्षी मलिक को सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की तो उनकी भी पदक जीतने की खुशी फिर से कई गुना बढ़ गई।
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deepa malik
- फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
पैरालंपिक की रजत पदक विजेता दीपा मलिक के लिए यह सम्मान ज्यादा अहम दिख रहा है, क्योंकि जिस तरह से दीपा ने हिम्मत दिखाकर खेल को अपनी जिंदगी बनाया और पदक जीता है। शायद ही ऐसा कोई कर सके, क्योंकि रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने के बाद दीपा ने कुछ करने का जज्बा जगाया और देश के लिए पदक जीत लिया।
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दीपा मलिक
- फोटो : अमर उजाला
सोनीपत के भैंसवाल गांव की रहने वाली दीपा मलिक को 1999 में रीढ़ में ट्यूमर हुआ तो उसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ऑपरेशन कराने के बाद खेलना शुरू किया और 2009 में पहला पदक जीतकर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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दीपा मलिक
- फोटो : facebook
दीपा मलिक ने नेशनल व इंटरनेशनल में 50 से ज्यादा गोल्ड मेडल जीते हुए है जो उनकी एक बड़ी उपलब्धि है। दीपा मलिक का कहना है कि इंसान को जिंदगी में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, जिसके बाद वह ऊंचाइयां छूता चला जाएगा और उसे सम्मान भी खूब मिलेगा।