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इस शख्स का तरीका अपनाएं, और खेती करके दोगुना कमाएं, इन्हें सरकार दे रही है पद्मश्री अवार्ड
Tue, 29 Jan 2019 09:15 AM IST
खुशबू गोयल
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 29 Jan 2019 09:15 AM IST
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कंवल सिंह चौहान
15 साल की उम्र में खेती करने लगे थे, और मुनाफा कमाने के लिए ऐसा तरीका खोज निकाला कि अब सरकार दे रही पद्मश्री अवार्ड। आप भी जानिए, तरीका बड़े काम आएगा।
कंवल सिंह चौहान
ये हैं हरियाणा में सोनीपत जिले के गांव अटेरना निवासी किसान कंवल सिंह चौहान, जिन्होंने यह समझाया है कि किस तरह खेती से आय को कई गुना किया जा सकता है। कंवल सिंह ने विदेशों तक भारतीय खेती की धमक दिखाई है और उनकी फसल आज केवल देश की विभिन्न जगहों तक ही नहीं, बल्कि विदेशों तक जाती है। खेती से लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने, स्वरोजगार के साथ जोडऩे और कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल करने पर उनको पद्मश्री दिए जाने की घोषणा हुई तो हर कोई काफी खुश दिखाई दिया। कंवल सिंह कहते है कि यह केवल उनका नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले हर किसान का सम्मान है।
कंवल सिंह चौहान
कंवल सिंह ने पिता के देहांत के बाद 15 साल की उम्र में खेती करनी शुरू कर दी थी। खेती की अधिक जानकारी नहीं होने के कारण वह कर्ज में डूबते चले गए थे। लेकिन कभी हार नहीं मानी और वह खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करते रहे। कंवल सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1998 में परंपरागत खेती को छोड़कर सबसे पहले मशरूम और बेबी कॉर्न की खेती शुरू की थी। दोनों फसलों से अच्छी आमदनी होने लगी और वह अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए। इसके बाद अन्य किसानों को अपने साथ जोड़कर उन्हें बेबी कॉर्न, मशरूम, स्वीट कॉर्न, मधुमक्खी पालन के लिए जागरूक करने लगे। जिससे दूसरे किसानों ने उनकी राह पकड़ी और वह भी इन खेती की ओर रुख करने लगे। उनके सहारे ही गांव व आसपास के किसान खेती से कई गुना तक फायदा ले रहे हैं।
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कंवल सिंह चौहान
200 से ज्यादा को दिया रोजगार, विदेशों तक उत्पाद हो रहे सप्लाई
कंवल सिंह चौहान ने बताया कि जब गांव में बेबी कॉर्न व स्वीट कॉर्न का उत्पादन बढ़ा तो किसानों को बाजार की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए वर्ष 2009 में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगा दी। उस समय करीब दो एकड़ में उस यूनिट में बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न, अनानास, फ्रूट कॉकटेल, बटन मशरूम, मशरूम स्लाइस आदि आठ तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस यूनिट से करीब डेढ़ टन बेबी कॉर्न व अन्य उत्पाद इंग्लैंड व अमेरिका में निर्यात होता है। इसके साथ ही लगभग 200 लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दिया जा रहा है।
कंवल सिंह चौहान ने बताया कि जब गांव में बेबी कॉर्न व स्वीट कॉर्न का उत्पादन बढ़ा तो किसानों को बाजार की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए वर्ष 2009 में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगा दी। उस समय करीब दो एकड़ में उस यूनिट में बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न, अनानास, फ्रूट कॉकटेल, बटन मशरूम, मशरूम स्लाइस आदि आठ तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस यूनिट से करीब डेढ़ टन बेबी कॉर्न व अन्य उत्पाद इंग्लैंड व अमेरिका में निर्यात होता है। इसके साथ ही लगभग 200 लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दिया जा रहा है।
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कंवल सिंह चौहान
खेती को लाभकारी व किसानों को समृद्ध बनाने की जिम्मेदारी बढ़ी
कंवल सिंह चौहान कहते हैं कि पद्मश्री से हौंसला बढ़ा है और उनके काम को मान्यता भी मिली है। इससे उनकी जिम्मेदारियां ओर बढ़ गई हैं। कृषि को लाभकारी व किसानों को समृद्ध बनाने की अब उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। वह कहते है कि पहले बहुत कम किसानों को ऐसा सम्मान मिलता था, लेकिन इसबार सबसे ज्यादा किसानों को यह सम्मान मिल रहा है जो कृषि के बेहतर भविष्य को दर्शाता है। वह कहते है कि अभी उनकी फर्म के साथ अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार किसान जुड़े हुए हैं, लेकिन युवाओं को कृषि क्षेत्र में आगे आना होगा।
कंवल सिंह चौहान कहते हैं कि पद्मश्री से हौंसला बढ़ा है और उनके काम को मान्यता भी मिली है। इससे उनकी जिम्मेदारियां ओर बढ़ गई हैं। कृषि को लाभकारी व किसानों को समृद्ध बनाने की अब उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। वह कहते है कि पहले बहुत कम किसानों को ऐसा सम्मान मिलता था, लेकिन इसबार सबसे ज्यादा किसानों को यह सम्मान मिल रहा है जो कृषि के बेहतर भविष्य को दर्शाता है। वह कहते है कि अभी उनकी फर्म के साथ अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार किसान जुड़े हुए हैं, लेकिन युवाओं को कृषि क्षेत्र में आगे आना होगा।