पोती ने अपने दादा प्यारे लाल वडाली को इस तरह से अंतिम विदाई दी कि देखकर सभी रो दिए, देखिए तस्वीरें।
उस्ताद पूरण चंद वडाली के छोटे भाई प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार सुबह अमृतसर में 8.25 पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शुक्रवार को ही पैतृक गांव गुरु की वडाली में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। बताया जा रहा है कि प्यारेलाल 26 फरवरी से फोर्टिस में भर्ती थे।
प्यारेलाल के बड़े भाई पूरनचंद वडाली ने बताया कि वे अपने पीछे तीन बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं। वो मेरे साथ ही गाया करते थे। मुझे ही अपना गुरु मानते थे। हमारी जोड़ी ने दुनियाभर में अपनी गायकी से एक अलग मुकाम बनाया था। मशहूर पटियाला घराने से भी हमारा ताल्लुक रहा।
पूरणचंद वडाली बताते हैं कि हम दोनों भाइयों ने पहलवानी भी की। करीब ढाई दशक तक अखाड़ा ही हमारे लिए सब कुछ था। हमनें जमकर पहलवानी की और कई खिताब भी जीते। लेकिन पिता ठाकुरदास वडाली ने पहलवानी छोड़ने और संगीत सिखने के लिए कहा और हमें बात माननी पड़ी।
पूरणचंद ने बताया कि शुरु में पिता ने संगीत की शिक्षा दी। उसके बाद पंडित दुर्गादास और उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पटियाला घराना से स्वर साधना सीखी। 1975 में जालंधर के गांव हरवल्लभ में हमने पहली बार प्रस्तुति दी थी।