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मदर्स डे स्पेशलः मां तुझे सलाम! पढ़ें 5 बेमिसाल कहानियां

Sun, 10 May 2015 04:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 10 May 2015 04:33 PM IST
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मदर्स डे स्पेशलः मां तुझे सलाम! पढ़ें 5 बेमिसाल कहानियां

mother day special: 4 unbelievable stories of mothers

मां! मां, ईश्वर का दूसरा रूप है, क्योंकि ईश्वर हर समय हर जगह इंसान के साथ मौजूद नहीं रह सकते, इसलिए उन्होंने मां का साथ इंसान को दिया। पढ़िए, भगवान के इस दूसरे रुप की महानता की 5 बेमिसाल कहानियां।

मदर्स डे स्पेशलः मां तुझे सलाम! पढ़ें 5 बेमिसाल कहानियां

mother day special: 4 unbelievable stories of mothers

पंजाब के जालंधर की एक मां मंजीत कौर की कहानी पढ़कर आप उन्हें सलाम किए बिना नहीं रह सकेंगे। ये मां अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए दिन-रात एंबुलेंस चलाती हैं। पंजाब की एक मात्र एंबुलेंस चालक मंजीत कौर 2010 से अपने बीमार पति और बेटे का सहारा बनी हुई हैं। इस मां की चाहत है कि उसका बेटा अच्छी नौकरी करें। उसका और अपने पापा का सहारा बने। इसके लिए वह जब तक एंबुलेंस चला सकेंगी, चलाएंगी। उनकी इच्छा है कि उनके बेटे को यूनिवर्सिटी में दाखिला मिले।

मदर्स डे स्पेशलः मां तुझे सलाम! पढ़ें 5 बेमिसाल कहानियां

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लुधियाना निवासी नेशनल और स्टेट अवार्डी लेखिका डॉ. गुरचरण कौर कोचर अपनी मां की बेमिसाल कहानी सुना रही हैं। वे बताती हैं कि उन्हें अपनी मां से एक ही शिक्षा मिली कि हर मुश्किल में भी बच्चों को शिक्षा देकर एक मुकाम पर पहुंचाना है। मां ने कपड़े सिल कर मुझे एक मुकाम तक पहुंचाया। मैंने भी अपने बच्चों की सफलता के लिए रोड मॉडल की तरह काम किया और दोनों बेटों को इंजीनियर बनाया। मां केवल पांचवीं पास थी। पिता लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने में विश्वास नहीं रखते थे, जबकि मां का एक ही सपना था कि उनकी बेटी उच्च शिक्षा हासिल करे। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन रात मेहनत भी की।

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mother day special: 4 unbelievable stories of mothers

मुक्तसर की रहने वाली नीलम एक मिसाल हैं। नीलम सेठी भी ऐसी ही मां हैं जिन्होंने हमेशा अपने बच्चों का भला सोचा और उन्हें मेहनती व काबिल बनाया। करीब चौदह वर्ष पहले नीलम सेठी के पति भारत भूषण सेठी का निधन हो गया। नीलम ने हिम्मत नहीं हारी और अपने दम पर बच्चों को पढ़ा-लिखा काबिल इंसान बनाया। आज नीलम का एक बेटा वेटरिनरी डॉक्टर है तो दूसरा न्यूजीलैंड में इलेक्ट्रिॉनिक्स कंपनी में मैनेजर है।

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गुरदासपुर निवासी एक शहीद की मां जीतो देवी की कहानी जानकर आप रो ही देंगे। इस मां का बेटा सुनील मदर्स-डे पर शहीद हो गया था। जीतो देवी बताती हैं कि वे जब भी आंखें खोलती हैं, उन्हें बेटे का चेहरा दिखाई देता है। आज भले ही उनके बेटे को शहीद हुए नौ साल बीत गए हैं लेकिन उसके स्पर्श की अनुभूति वह हर मदर्स-डे पर महसूस करती हूं।

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