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पायलट बनना था, वैज्ञानिक बन गए, पढ़ें अब्दुल कलाम की जिंदगी के चुनिंदा किस्से
Mon, 16 Oct 2017 09:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Updated Mon, 16 Oct 2017 09:10 AM IST
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अब्दुल कलाम
- फोटो : SELF
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पायलट बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत में वैज्ञानिक बनना लिखा था। बर्थडे के मौके पर पढ़िए मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम की जिंदगी से जुड़े चुनिंदा किस्से।
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इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत रत्न और देश के 11वें राष्ट्रपति रहे डॉ. अब्दुल कलाम एक बेमिसाल शख्सियत थे। विश्व पटल पर जहां उन्हें मिसाइल मैन के रुप में जाना जाता है, वहीं बच्चों से उनका प्यार, रचनात्मक कविताएं, युवाओं को प्रेरित करते विचार उन्हें बाकी शख्सियतों से अलग पहचान दिलाती है। डॉ. कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ मनोवैज्ञानिक भी थी। उनको चेहरा पढ़ना भी आता था। वो किसी का भी चेहरा पढ़कर उसके बारे में बता देते थे।
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आज भले ही डॉ. कलाम हमारे बीच न हों, लेकिन उनसे जुड़ी यादें और उनके संदेश हमेशा देश और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गांव में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व का अब्दुल कलाम पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनकी जीवनशैली, लगन और संस्कार ही अब्दुल कलाम के काम आए।
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अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष किया। पढ़ाई करने के लिए अखबार बांटने का काम भी किया। 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि ली। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में एंट्री की। बच्चों से कलाम साहब को बहुत प्यार था, जिसके किस्से अकसर देखने को मिलते थे।
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अब्दुल कलाम मुंबई में एक सेमीनार को संबोधित कर रहे थे तो एक छोटी लड़की आई और उसने पूछा कि वह उनसे हाथ मिला सकती है। इसका जवाब अब्दुल कलाम ने ना केवल हां में दिया, बल्कि लड़की को मंच पर बुलाकर हाथ मिलाया। डॉ. कलाम को युवाओं से भी बेहद लगाव था। एक बार एमबीबीएस के एक स्टूडेंट ने कलाम को एक कविता लिखकर दी थी। इस कविता को पढ़कर उन्हों छात्र का धन्यवाद किया।
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