इतने दिन बीत गए लेकिन किसी के दिमाग में ये बात आई कि गरीब व मध्यवर्गीय लोग तो बैंकों में लगी लाईनों में खड़े है लेकिन अमीरों के नोट कहां गए?
1000-500 के नोटों को बदलने का ज्यादातर रूझान गरीब व मध्यवर्गी लोगों में ही दिख रहा है। बैंकों की लंबी-लंबी लाईनों में गरीब व मध्यवर्गी लोग ही दिखाई दे रहे है।
लोग अक्सर यह चर्चा करते सुने गए कि आखिर फिर अमीर लोगों के नोट कहा गए। क्योंकि एक भी अमीर व्यक्ति किसी भी बैंक की लाईन में दिखाई नही दिया।
शहर का कोई भी अमीर लाइनों में तो नहीं दिखा और न ही किसी बैंक से रुपए बदलता और न ही जमा करवाता मिला। फिर उनके 500 और 1000 के नोट गए तो गए कहां?
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बैंकों पर बढ़ी कतार
- फोटो : अमर उजाला
जब इस सबंधी बैंकों के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने इस पर कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया। उन्होंनें सिर्फ इतना ही कहा कि सरकार की नीति के मुताबिक उनके लिए सब अमीर गरीब बराबर है।