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करवा चौथ पर 27 साल बाद बन रहा 'अमर सुहाग' योग, जो फलदायी होगा, तो ऐसे पूजन करें सुहागिनें
Thu, 17 Oct 2019 09:15 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 17 Oct 2019 09:15 AM IST
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करवा चौथ
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करवा चौथ पर्व 27 साल बाद 17 अक्तूबर को अमर सुहाग योग में आ रहा है, जो फलदायी रहेगा। इसके लिए सुहागिनों को खास तरीके से पूजन करना होगा।
करवा चौथ
करवा चौथ के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और रात को चांद देखने के बाद अपना व्रत खोलेंगी। इस बार करवाचौथ में रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से अमर सुहाग योग, मार्कण्डेय योग और सत्यभामा योग बन रहा है। यह योग चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है। पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह फलदायी होगा। ऐसा योग भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय ही बना था।
करवा चौथ
यह जानकारी रोहतक स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य मनोज मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि करवा चौथ की पूजा से पहले भजन-कीर्तन जरूर करें। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है और पूजन का पूर्ण फल मिलता है। करवाचौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं यदि लाल रंग के कपड़े पहनती हैं तो वह शुभ होगा। लाल रंग गर्मजोशी का प्रतीक है और मनोबल भी बढ़ता है। साथ ही लाल रंग को प्यार का प्रतीक माना जाता है।
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करवा चौथ
जानकारों की माने तो नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े महिलाएं न पहनें, क्योंकि ये अशुभ के प्रतीक हैं। इस व्रत में सास अपनी बहू को सरगी देती है। इस सरगी को लेकर बहुएं अपने व्रत की शुरुआत करती हैं। इस व्रत में शाम के समय शुभ मुहूर्त में चांद निकलने से पहले पूरे शिव परिवार की पूजा की जाती है। चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पानी पीकर व्रत खोलती हैं।
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करवा चौथ
करवाचौथ व्रत की पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें, पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। करवाचौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करती फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद व्रत खोलती हैं। पूजा के समय थाली में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिंदूर रखें और घी का दीपक जलाएं।
सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें, पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। करवाचौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करती फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद व्रत खोलती हैं। पूजा के समय थाली में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिंदूर रखें और घी का दीपक जलाएं।