सेना, वायुसेना की महत्वपूर्ण सूचनाओं में दुश्मनों के लिए सेंधमारी और जासूसी अब आसान नहीं होगी, क्योंकि एक परियोजना पर काम किया जा रहा है।
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- फोटो : BASIT ZARGAR
भारतीय नौसेना के बाद अब सेना और एयरफोर्स के लिए भी बहुत जल्द अंतरिक्ष में अलग कम्यूनिकेशन सेटेलाइट स्थापित होने वाला है। इस खास परियोजना पर इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन) काम कर रहा है।
इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनॉलिसिस के वरिष्ठ सदस्य अजय लेले ने बताया कि अंतरिक्ष में सेना और एयरफोर्स का अलग कम्यूनिकेशन सेटेलाइट स्थापित होने से भारतीय सेना का संचार पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
बता दें कि इस तकनीक के मामले में चीन अभी सबसे आगे है। चीनी सेना अपनी जैमिंग तकनीक से किसी भी कम्यूनिकेशन को जाम कर सकती है। यही वजह है कि भारतीय सेना अपना अलग सुरक्षित सेटेलाइट आधारित कम्यूनिकेशन सिस्टम चाहती है।
इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन भारतीय नौसेना के लिए एक अलग सेटेलाइट जीएसएटी-7 (रुक्मणी) अंतरिक्ष में स्थापित कर चुकी है। यह नौसेना का सबसे पहला कम्यूनिकेशन सेटेलाइट था। आज यह भारतीय नौसेना के लिए सुरक्षित रियल टाइम कम्यूनिकेशन के तौर पर काम कर रहा है। इसी तर्ज पर इसरो सेना और वायुसेना के लिए सेटेलाइट लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा है।