इंडियन आईडल: बठिंडा पहुंचे सनी हिंदुस्तानी, मां के लिए कही ये बात, ढोल-नगाड़ों संग निकला रोड शो
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इंडियन आईडल 11 में अपनी आवाज से फर्श से अर्श तक पहुंचे सन्नी हिंदुस्तानी ने कहा कि मां के दिए गए आखिरी मौके ने उसे बुलंदियों तक पहुंचाया है। सात माह बाद गुरुवार को मुंबई से सन्नी अपने गृह जिले में पहुंचा। जहां शहरवासियों ने सन्नी का जोश के साथ स्वागत किया। शहर के मुख्य बाजारों में सन्नी ने जीप में सवार होकर अपने साथियों संग रोड शो के जरिये शहरवासियों का धन्यवाद किया।
स्टार बन चुके सन्नी हिंदुस्तानी ने प्रेसवार्ता में भावुक होते हुए बताया कि जब उसके दोस्त ने इंडियन आईडल के ऑडिशन के बारे में बताया तो वह शो में जाने के लिए प्रयास करने लगा। लेकिन गरीबी के कारण उसकी मां ने उसे शो में जाने से रोका। जब उसने जिद की तो मां ने कहा कि सन्नी यह तेरा आखिरी मौका है अगर तू इस मौके में कामयाब नहीं हुआ तो तुझे आगे से किसी शो में भाग लेने नहीं जाने दिया जाएगा।
सन्नी ने बताया कि उसकी मां के आखिरी शब्द थे कि बेटा तेरे पिता का साया सिर पर नहीं और तुझे को शो में भेजने के लिए मेरे पास पैसे नहीं। सन्नी ने बताया कि वह किसी तरह अपने दोस्तों से पैसे लेकर शो में पहुंचा तो परमात्मा ने उसकी सुन ली। सन्नी ने कहा कि पहले उसकी किसी ने कोई सहायता नहीं की, लेकिन अब जब वह कामयाब हुआ तो सभी उसके इर्द गिर्द घूम रहे हैं। उसने कहा कि कामयाब होने के लिए खुद मेहनत करनी पड़ती है, कोई किसी की मदद नहीं करता।
मां को रानी बनाकर रखूंगा
सन्नी ने कहा कि उसे गरीबी का वो दौर याद है जब उसकी मां उनको दो वक्त की रोटी खिलाने के लिए खुद भूखे पेट लोगों को गुब्बारे बेचकर पैसे कमाती थी। उसने कहा कि अब वो अपनी मां को रानी बनाकर रखेगा। उसने कहा कि रोड शो के दौरान शहरवासियों ने उसे इतना प्यार दिया कि वो अभी तक सोच रहा है कि कहीं यह सब सपना तो नहीं है।
तीन फिल्मों में गा चुका गाने
सन्नी ने बताया कि इंडियन आइडल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी ने चलते शो के दौरान तीन फिल्मों के लिए गाना गाया हो। उसने बताया कि भगवान की कृपा से उसे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उसने पंगा एवं हिमेश रेशमियां की फिल्म समेत तीन फिल्मों के लिए गाना गाया है।
परिवार से मिलकर खुशी हुई दोगुनी
सन्नी ने कहा कि जैसे ही उसने बठिंडा की धरती पर कदम रखा तो उसने धरती को चूमा और अपनी मिट्टी को माथे पर लगाया। उसने कहा कि वह कभी बठिंडा नहीं छोडे़गा और शहर में ही किसी जगह परिवार संग रहेगा।