देश की इस योग गुरु से मिलिए, जिन्होंने अपनी योग मुद्राओं से चीन को दीवाना बना लिया है और अब जापान इनके चाहने वालों की सूची में आने को बेताब है।
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Vijay Lakshmi
- फोटो : Facebook
बेटियां चांद पर पहुंच चुकी हैं। बेटा-बेटी में फर्क नहीं है। यह संदेश विजय लक्ष्मी ने पड़ोसी देश चीन से लौटकर दिया है। उन्होंने चीन के करीब पांच हजार लोगों को योग से जोड़ने का काम किया। चीन की दीवारों से लेकर हेल्थ क्लबों में विजय लक्ष्मी ने अपनी छाप छोड़ी है। लक्ष्मी ने योग प्रशिक्षक के तौर पर चीन के साथ अनुबंध किया था, अब जापान की संस्था ने भी उससे संपर्क साधा है।
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विजय लक्ष्मी पंजाब के जालंधर की रहने वाली हैं। जालंधर के मास्टर महंगा सिंह कॉलोनी के गली नंबर आठ की विजय लक्ष्मी चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। पिता रामसुंदर पाल सरकारी नौकरी करते हैं, जबकि मां बरखा पाल गृहिणी हैं। लक्ष्मी की प्रारंभिक पढ़ाई कैंट बोर्ड के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई। उसके बाद उन्होंने एचएमवी में स्नातक की।
पिता की नौकरी में चार भाई-बहनों की पढ़ाई व घर का खर्च चलना जब मुश्किल था, वहीं लक्ष्मी को स्कूल की पढ़ाई के बाद कॉलेज में दाखिला लेना था। पिता की आंखों में बेबसी देख लक्ष्मी रो पड़ी। उसने ठान लिया कि वह अब जिंदगी में कुछ कर दिखाएगी। मन में उम्मीद लिए लक्ष्मी ने अर्थोपार्जन के लिए योग को चुना। उसने योग का प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
इसी बीच जालंधर के ही चंद्रमोहन सैनी और मनवीर सिंह ने लक्ष्मी के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानी। लक्ष्मी ने दो ही साल में योग का प्रशिक्षण पूरा कर लिया। वर्ष 2002 से 2007 के बीच लक्ष्मी महाराष्ट्र योग एसोसिएशन और पंजाब स्टेट योग चैंपियनशिप में पहले स्थान पर रही। वर्ष 2007 में ही मध्यप्रदेश में हुई अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन में विजय लक्ष्मी ने अपनी प्रतिभा का लोहा जहां मनवाया।