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32 साल पहले जो इतिहास रचा था, भारतीय सेना उसे फिर दोहराएगी, जानिए क्या?

Wed, 31 Jan 2018 10:41 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 31 Jan 2018 10:41 PM IST
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indian army teams will walk around the world via sea route
INDIAN ARMY - फोटो : AMAR UJALA
भारतीय सेना ने 32 साल पहले जो इतिहास रचकर दुनिया को चकित कर दिया था, वहीं एक बार फिर से दोहराया जाएगा, तैयारी शुरू हो गई है।
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पाल नौका जलयात्रा
दरअसल एक बार फिर सेना की टीमें समुद्री रास्ते के जरिये दुनिया का चक्कर लगाएंगी। इसमें खास बात यह कि इस बार सेना की महिला अफसर भी इस एडवेंचर का हिस्सा बनेंगी। इस ऐडवेंचर का मकसद दुनिया के समुद्रों का अनुभव बटोरना और फिर उस अनुभव से सेना के दूसरे अफसरों, जवानों और यूथ को प्रशिक्षित करना होगा। युवकों को प्रशिक्षित करने का मकसद उनमें सेना और सैन्य साहस के प्रति रुझान पैदा करना होगा।
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पाल नौका जलयात्रा
इसके लिए सेना के ‘आर्मी ऐडवेंचर सेल’ की ओर से मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस को प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा हुआ है। सेना की कोर ऑफ इंजीनियरिंग विंग की ओर से इस तरह के ऐडवेंचर का आयोजन किया जाता है। सन 1985 से 1987 तक पहली बार ऐसा ऐडवेंचर इंडियन आर्मी ने किया था। अब आर्मी ऐडवेंचर सेल चाहता है कि इस जोखिम भरे साहसिक कार्य को फिर से दोहराया जाए।
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पाल नौका जलयात्रा
सेना हाईकमान को भेजे प्रस्ताव में महिला और पुरुष अफसरों की दो टीमों को समुद्र के रास्ते विश्व भ्रमण के लिए भेजने की अनुमति मांगी गई है। देश में सबसे पहले इस ऐडवेंचर को लीड करने वाले बिग्रेडियर तेजपाल सिंह चौधरी ने बताया कि यह एडवेंचर बहुत ज्यादा खतरनाक था। सेना की कोर ऑफ इंजीनियर की ओर से आयोजित ‘पाल नौका जलयात्रा’ की शुरुआत 28 सितंबर 1985 को हुई थी और 10 जनवरी 1987 को ये दल वापस मुंबई लौटा था।
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indian army
इस पाल नौका को ‘तृष्णा’ का नाम दिया गया था। इस टीम में बिग्रेडियर टीपीएस चौधरी टीम मैनेजर एवं क्रू इंचार्ज थे, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल केएस राव, मेजर एके सिंह, बिग्रेडियर सी. भारती, कर्नल एस. शेखर, बिग्रेडियर एपी सिंह, मेजर ए. भट्टाचार्य, मेजर एसएन माथुर, बिग्रेडियर एन. आहूजा, मेजर जनरल आर बस्सी भी टीम में शामिल थे। इस ऐडवेंचर में टीम ने बहुत समुद्री तूफान व अंधड़ झेले।
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