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1971 के युद्ध में भारत ने कैसे चटाई थी पाकिस्तान को धूल, सच आया सामने

Fri, 08 Dec 2017 09:12 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 08 Dec 2017 09:12 AM IST
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indian army strategy in indo pak war 1971
1971 का भारत पाक युद्ध
1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ गजब की एक रणनीति अपनाई थी और दुश्मनों को धूल चटा दी थी। उस रणनीति का खुलासा अब हुआ है, जानिए।
indian army strategy in indo pak war 1971
1971 का भारत पाक युद्ध
1971 में इंडो-पाक युद्ध के दौरान शकरगढ़ सेक्टर में इंडियन आर्मी के जवान छह टैंक लिए आगे बढ़ रहे थे। इन टैंकों की जिम्मेवारी थी कि पाकिस्तान द्वारा यहां तैयार की गई तीन माइन्स फील्ड को क्लीयर कर इंफेंटरी के लिए सेफ लाइन तैयार करना। दूसरा, पाकिस्तान के टैंकों को नेस्तनाबूद करना। इसके लिए  इंडियन आर्मी ने एक खास रणनीति तैयार की थी।
indian army strategy in indo pak war 1971
1971 का भारत पाक युद्ध
रणनीति के तहत इस काम के लिए जिन टी-55 टैंकों का इस्तेमाल किया गया। उन टैंकों पर ब्रिटेन निर्मित सेंचुरियन टैंक नकली बैरकें लगाई गईं। इसका मकसद था पाकिस्तान को डराना और युद्ध के दौरान अपने टैंकों की पहचान रखना। दरअसल, सेंचुरियन टैंक से पाकिस्तान बहुत खौफजदा था। इस टैंक का इस्तेमाल भारत ने  पाकिस्तान के खिलाफ सन 1965 की लड़ाई में किया था।
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1971 का भारत पाक युद्ध
यह युद्ध पंजाब के तरनतारन के पास स्थित आसल उताड़ क्षेत्र में लड़ा गया था और ये इंडो-पाक के बीच तीन दिन तक चलने वाला सबसे बड़ा टैंक युद्ध था। इस युद्ध में इंडिया ने इसी टैंक के बूते पाक 90 टैंकों को नेस्तनाबूद कर उसके घुटने टिकवा दिए थे। तभी से पाकिस्तान इस टैंक से डरने लगा था। सन 1971 के युद्ध में शकरगढ़ सेक्टर में हालांकि इस टैंक का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
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1971 का भारत पाक युद्ध
लेकिन युद्ध में इस्तेमाल हो रहे टैंक टी-55 पर सेंचुरियन टैंक बैरल लगाकर पाकिस्तानी जवानों और अफसरों के पसीने जरूर छुड़ाए गए। इस युद्ध का हिस्सा रहे रिटायर्ड कर्नल जेडीएस जींद के अनुसार ऐसा करना सेना की रणनीति का हिस्सा था। वह चंडीगढ़ में आयोजित मिलट्री लिटरेचर फेस्टिवल में आए हुए थे। यहां क्रू मेंबर ओमप्रकाश ने बताया कि छह टैंकों को पाकिस्तान द्वारा इस सेक्टर में बिछाई गई तीन माइंस फील्ड को क्लीयर करने का टास्क दिया गया था।
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