पत्नी बॉर्डर पर देश की रखवाली के लिए जाने की तैयारी कर रही थी कि उसी सरहद से पति की मौत की खबर आ गई। 3 बहनों का इकलौता भाई, पल में सभी को छोड़कर चला गया, जानिए वीर बहादुर के बारे में सब कुछ।
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में बुधवार को क्रैश हुए सेना के एमआई-17 में दो पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हादसे में चंडीगढ़ के पायलट सिद्धार्थ वशिष्ठ ने भी जान गंवा दी। स्क्वाडर्न लीडर सिद्धार्थ (31) उपराष्ट्रपति, एयर चीफ मार्शल और प्रधानमंत्री को साथ लेकर हवाई यात्रा कर चुके थे। हादसे की खबर आते ही उनके सेक्टर-44 स्थित आवास पर मातम का माहौल है। सिद्धार्थ तीन बहनों के बाद सबसे छोटे भाई थे। उनके निधन की खबर के बाद घर में सभी का रो रोकर बुरा हाल है।
सिद्धार्थ की पत्नी आरती सिंह भी इंडियन एयरफोर्स में स्क्वाडर्न लीडर हैं। वह जम्मू-कश्मीर में ही तैनात हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से छुट्टियों पर थीं और गुरुग्राम स्थित अपने भाई के घर गईं हुईं थीं, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद उन्हें सेना ने वापस बुला लिया। वह जम्मू-कश्मीर जाने की तैयारी ही कर ही रहीं थीं कि बुधवार सुबह पति की मौत की खबर आ गई। ऐसे में वह इस पशोपेश में थीं कि देश की रखवाली करने सरहद पर जाएं या फिर चंडीगढ़ में अपने परिवार के पास। परिवार के कहने पर वह बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे चंडीगढ़ पहुंच गईं।
वहीं सिद्धार्थ की दादी बार-बार उनकी फोटो देखकर एक ही बात दोहरा रही हैं कि मेरे सोहणे मुखड़े वाला बच्चा मुझे छोड़ गया। सिद्धार्थ के पिता जगदीश वशिष्ठ भी आर्मी में रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि आखिरी बार सिद्धार्थ से मंगलवार सुबह बात हुई थी, वह भी सिर्फ 10 सेकंड के लिए। सिद्धार्थ ने कहा था कि यहां सब कुछ ठीक है, घबराने की जरूरत नहीं। आप आराम करो। बुधवार सुबह से टीवी पर भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव भरे माहौल की खबरों को देख रहे थे, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके बेटे के साथ ही ऐसा हादसा हो जाएगा।
सिद्धार्थ 154 हेलीकॉप्टर यूनिट से थे। उनके निधन की खबर उन्हीं के टीम मेंबर ने दी। यह कहते ही सिद्धार्थ के पिता की आंखें छलक पड़ीं। यह देखकर पास खड़ी बेटी ने सभी को कहा कि अब प्लीज बस करो, लेकिन पिता जगदीश वशिष्ठ तुरंत बोले...इन्हें पूछने दो, कहीं लोग यह न समझें कि फौजी का बाप कमजोर पड़ गया। सिद्धार्थ के पिता ने बताया कि उनका पूरा परिवार ही देश सेवा में समर्पित रहा है। चार पीढ़ियों से उनके परिवार में सभी फौज में हैं। जगदीश खुद फौज में थे। जगदीश के पिता और दादा भी फौज में रहे।